शिल्परत्नम् (श्रीकुमार - प्राचीन भारतीय चित्रकला, धातुकर्म, यन्त्र एवं स्थापत्य सटीक)
Shilparatnam of Shrikumara with Commentary
श्रीकुमार (सम्पादक: टी. गणपति शास्त्री) द्वारा
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विषयः. पृष्ठम्. | विषयः. पृष्ठम्.
मूलदुर्गा १३३ | इन्द्रः १५०
लिपिः १३० | ऐन्द्री गायत्री १५२
भुवनेश्वरी " | ऐन्द्री त्रिष्टुप १५३
हल्लेखा १३५ | अग्निः "
वागीश्वरी .. | संवादाग्निः "
श्रीः " | समर्द्धिः "
त्वरिता " | तद्भेदः १५४
धूमावती १३६ | रक्षोहाग्निः "
काली " | यमः "
भैरवी १३७ | निर्ऋतिः १५५
मातङ्गी .. | वरुणः "
शक्तिप्रणवः " | वायुः "
वनदुर्गा १३८ | धनदः "
त्रैलोक्यमोहिनी १३९ | सोमः १५५
संविन् " | ब्रह्मा १५६
इन्द्राणी " | शेषः "
स्वयंवरा १४१ | महागणपतिः "
प्राणशक्तिः १४२ | बीजगणपतिः १५८
अश्वारूढा .. | हेरम्बः १५९
वज्रप्रस्तारिणी " | बालगणपतिः "
नित्यक्लिन्ना १४३ | सुब्रह्मण्यः "
श्रीसूक्तम् " | नागयक्षी १६०
त्रिपुटा १४४ | शास्ता "
त्रिपुरा " | प्रभा १६१
भूमिः " | सत्यकः "
शूलिनी १४५ | अनुष्टुप्त्रयम् "
गायत्री " | शक्तिगणपतिः १६२
गायत्री त्रिष्टुप् " | लक्ष्मीनारायणः "
सौरी चतुरक्षरी १४६ | अर्धनारीश्वरः "
अन्नपूर्णा " | शङ्करनारायणः १६३
सप्तमातरः " | सूर्यः "
श्रीचक्रप्रस्तारः १४७ | सौरमष्टाक्षरम् "
| कामः १६४
पञ्चविंशोऽध्यायः । | वीरभद्रः "
इन्द्रादिदेवताध्यानप्रकरणम् १५०-१७३ | हनूमान् "