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सर्वकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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द्वितीय पटल ] [ ३५
जया दुर्गा प्रभा सत्या चण्डा वाणी विलासि (शालि) नी ।
विजया विरजा विश्वा विनदा सुनदा स्मृतिः । ५३
ऋद्धिः समृद्धिः शुद्धिः स्यात् भक्तिबुद्धिः स्मृतिः (१) क्षमा ।
रमोमा क्लेदिनी क्लिन्ना वसुधा वसुदाऽपरा । ५४
परा परायणी सूक्ष्मा सन्ध्या प्रज्ञा प्रभा निशा ।
अमोघा विद्युता चेति कीर्त्याद्याः सर्वकामदाः । ५५
केशव से आदि लेकर ये श्याम शंख - चक्र से शोभित करकमलों
वाले हैं । कीर्ति कान्ति, तुष्टि, पुष्टि, धृति, श्रान्ति, क्रिया, दया, मेधा
सहर्षा, श्रद्धा, लज्जा, लक्ष्मी, सरस्वती, प्रीति, रति, वे क्रम से स्वरों
की शक्तियाँ बतलाई गई हैं । ५१-५२। जया] दुर्गा, प्रभा, सत्या, चण्डा,
वाणी, विलासिनी, विजया, विरजा, विश्वा, विनदा, सुनदा, स्मृति, ऋद्धि
समृद्धि, शुद्धि, भक्ति, वृद्धि, स्मृति, क्षमा, रमा, उमा, क्लेदिनी, क्लिन्ना,
वसुधा. वसुदा, अपरा, परा, परायणी, सूक्ष्मा, सन्ध्या, प्रज्ञा, प्रभा,
निशा, अमोघा, विद्युता और कीर्ति आदि सब कामनाओंके प्रदान कर
ने वाली हैं । ५३-५५।
एताः प्रियतमाङ्केषु निष्षणाः सस्मिताननाः ।
विद्युद्दामसमानाङ्ग्यः पङ्कजाऽभयवाहवाः । ५६
मातृकाकावर्णभेदेभ्यः सर्वे मन्त्राः प्रजज्ञिरे ।
मन्त्रविद्याविभागेन त्रिविधा मन्त्रजातयः । ५७
मन्त्राः पुंदेवता ज्ञेया विद्याः स्त्रीदेवताः स्मृताः ।
पुंस्त्रीनपुंसकात्मानो मन्त्राः सर्वे समीरिताः । ५८
पुंमन्त्रा हुफडन्ताः स्युर्द्विठान्ताश्च स्त्रियो मताः ।
नपुंसका मनोनन्ताः स्युरित्युक्ता मनवस्त्रिधा । ५६
शस्तास्ते त्रिविधा मन्त्रा वश्यशान्त्यभिचारके ।
अग्नीषोमात्मका पन्त्रा विज्ञेयाः क्रूरसौम्ययो । ६०
ये सब अपने प्रियतम की गोद में विराजमान हैं और इनका मुख