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सर्वकोश
सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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नागरजी (कल्पवृक्ष के संस्थापक उज्जयनी), और श्री विनायकराव
बापू वैशंपायनजी देवास का भी अनुग्रह प्रकट करना जरूरी
समझता हूं जिनने अपना बहुमूल्य समय प्रदान करके ग्रंथ पर अपनी
सहानुभूति एवं संम्मति प्रदान की है, जो ग्रंथ के पूर्व भाग में
प्रकाशित की जाती हैं।
परिशिष्ट मे नासदासीय ऋग्वेदीय सूक्त भी हिंदी अनुवाद सहित
दिया जा रहा है।
देवास-मध्यभारत }
सं० २००५ } विष्णुतीर्थ