सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसौन्दर्य लहरी २५१
४ धारा ( आधुनिक धार ), ५ मधुरा ( आधुनिक मथुरा अथवा
मदुरा ), ६ भोगवतिका ( अमरावती ), ७ अवन्ती ( आधुनिक
उज्जैन ) ८ विजया ( आधुनिक विजय नगर )।
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विशाला कल्याणी स्फुटरुचिरयोध्या कुवलयैः
कृपाधारा धारा किमपि मधुराभोगवतिका ।
अवन्ती दृष्टिस्ते बहुनगरविस्तारविजया
ध्रुवंत तन्नामव्यवहरणयोग्या विजयते ॥
कठिन शब्दों का अर्थ:— कुवलय=कमल; व्यवहरण=नाना-
अर्थों के संदेह को हरण करने वाले ।
अर्थ:— तेरी दृष्टि विशाला, कल्याणी खिले हुए कमलों की
शोभा की उपमा से ऊंची अयोध्या, कृपा की धारा सदृश धारा,
कुछ २ मधुरा, भोगवतिका, सबकी रक्षा करने वाली अवन्तिका, और
अनेक नगरों के विस्तार को जीतने वाली विजया है, और निश्चय
से इन प्रत्येक नगरियों के नाम से संबोधित नाना अर्थों के संदेह
को हरण करने के योग्य है । अर्थात् प्रत्येक के नाम की
भाव सूचक है ।
विशाला अर्थात् उदारता के कारण विशाला है । सबका कल्याण
करती है, इसलिये कल्याणी है । कमलों की शोभा तेरे सामने हार
मानती है, इसलिये अयोध्या है । मधुर होने के कारण मधुरा है ।