सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी १२३
महत्तरी, २५. परम गुरू, मंगला, २६. पराधिकार गुरू, सौकर्या,
२७. पूज्य गुरू, रामा ।
आकाश— १. हृदय, कौलिनी, २. घर, कान्ता, ३. भोग,
विशेषी, ४. भय, योगिनी, ५. मह, ब्रम्ह तारा, ६. शव, शवरी,
७. द्रव, कालिका, ८. सरस, जुष्ट चांडाली, ९. मोह, अघोरेशी
१०. मनो भव, हेला, ११. केक, महारक्ता, १२. ज्ञान गुह्य,
कुब्जिका, १३. खर, डाकिनी, १४. ज्वल शाकिनी, १५. महाकुल,
लाकिनी, १६. भियोज्वल, काकिनी, १७. तेज, साकिनी, १८.
भूति, हाकिनी, १९ वासु, पापघ्नी, २०. कुल, सिंही, २१. संहार,
कुलांबिका, २२. विश्वंभर, कामा, २३. कौटिल, कूण माता, २४.
गालव, काली, २५. व्योम, व्योमा, २६. श्वसन, नादा, २७.
खेन्वर, महादेवी, २८. बहुल, महत्तरी, २९. तात, कुण्डलिनी, ३०.
कुलातीत, कुलेश्वरी, ३१. अज, ईंधिका, ३२. अनन्त, दीपिका,
३३. ईश, रेचिका, ३४. शिख, मोचिका, ३५. परम, परा,
३६. पर, चिति ।
मन— १. पर, परा, २. भव, भवपरा, ३. चित्, चित्परा,
४. महामाया, महामाया परा, ५. इच्छा, इच्छापरा, ६. सृष्टि, सृष्टि
परा, ७. स्थिति, स्थिति परा, ८. निरोध, निरोध परा, ९. मुक्ति, मुक्ति
परा, १०. ज्ञान, ज्ञान परा, ११. सत्, सति परा, १२. असत्, असति
परा, १३. सदसत्, सदसति परा, १४. क्रिया, क्रिया परा, १५. आत्मा,
आत्मपरा, १६. इंद्रियाश्रय, इंद्रियाश्रय परा, १७. गोचर,
गोचर परा, १८. लोक मुख्य, लोक मुख्य परा, १९. वेदवत्, वेद-
वतिपरा, २०. संवित्, संविति परा, २१ कुण्डलिनी, कुण्डलिनी परा,