सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished415 पृष्ठ
पृष्ठ 1, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1
इस चित्र में देवी श्री ललिता त्रिपुरासुंदरी (मध्य में सिंहासनासीन), देवी महालक्ष्मी (बाईं ओर), देवी सरस्वती (दाईं ओर) तथा मध्य में श्रीयंत्र का पारम्परिक धार्मिक स्वरूप दर्शाया गया है।
चित्र में कोई देवनागरी या संस्कृत पाठ/मंत्र/श्लोक अंकित नहीं है (केवल निचले दाएँ कोने में चित्रकार का अस्पष्ट अंग्रेज़ी हस्ताक्षर और बाएँ कोने में प्रकाशक का प्रतीक-चिह्न है)। अतः लिप्यंतरण हेतु कोई देवनागरी पाठ उपलब्ध नहीं है।