सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)
Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary
भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशः परिच्छेदः ५४३
एवं चोदितो वासुदेवः प्रथमं चित्रमृत्काष्ठशिलालोहमयत्वेन पञ्चविधानां
बिम्बानां प्रत्येकं ब्राह्मणादिवर्णक्रमेण चातुर्विध्यम्, एवं तत्तद्वर्णानुसारेण तत्तद्-
द्रव्यमयबिम्बग्रहणस्य सकामविषयत्वं बिम्बसामान्यग्रहणस्य निष्कामविषयत्वं चाह—
चित्रमृत्काष्ठशैलोत्यमित्यारभ्य लाभालाभवशात् पुनरित्यन्तम् ॥ ३-११ ॥
इस प्रकार पूछे जाने पर श्री भगवान् के कहा—१. चित्र, २. मिट्टी, ३.
काष्ठ, ४. शिला और ५. लोहे के भेद से पाँच प्रकार के बिम्ब होते हैं। उसके
ब्राह्मणादि वर्ण क्रम से प्रत्येक के चार-चार भेद होते हैं। तत्तद् वर्णानुसार तत्तद्
द्रव्य का बना हुआ बिम्ब ग्रहण सकाम विषय कहा गया है। बिम्ब का सामान्य
ग्रहण बिम्ब का निष्काम विषय कहा गया है। भीत, काष्ठ और कपड़े पर निर्माण
किया गया बिम्ब चित्तमय-बिम्ब कहा जाता है। इसके बाद वर्णक्रम के अनुसार
कपड़े का बिम्ब कार्पास, कौशेय, क्षौम और सन के भेद से बनाया गया बिम्ब
अम्बरोत्थित बिम्ब कहा जाता है ॥ ३-६ ॥
मृज्जमेवं सिताद्युत्थं वार्क्षं विविधमेव च ॥ ६ ॥
आश्वत्थं ब्रह्मवृक्षोत्थं श्रीपर्णीसुरदारुजम् ।
सालतालमयं चैव शाशवन्तीन्दुसारजम् ॥ ७ ॥
एवं द्वयं द्वयं विद्धि द्विजादीनां यथाक्रमम् ।
अतोऽन्ये दृढमूलाश्च सारवन्तो हि याज्ञिकाः ॥ ८ ॥
साधारणाश्चतुर्णां तु प्रतिमाद्ये च कर्मणि ।
सामान्यं भुक्तिमुक्त्यर्थमश्ममृण्मयवत् स्मृतम् ॥ ९ ॥
तारहाटकताम्रोत्थम् आरकूटमयं तथा ।
एवं हि भूमयो वस्त्रपाषाणा धातवो द्रुमाः ॥ १० ॥
वज्रादयोऽखिला रत्नाः सितरक्तादिलक्षणाः ।
असामान्याः फलेप्सूनां लाभालाभवशात् पुनः ॥ ११ ॥
इसी प्रकार श्वेत, नील, पीत और श्याम वर्ण की मिट्टी से निर्मित बिम्ब
मृज्ज बिम्ब कहा जाता है। वृक्षों से बना हुआ बिम्ब अनेक प्रकार का होता है—
अश्वत्थ बिम्ब, ब्रह्मवृक्ष (पलाश) बिम्ब, श्रीपर्णी बिम्ब, सुरदारुज बिम्ब, सालत्य
बिम्ब, ताल बिम्ब, शशवन्ती बिम्ब, इन्द्रसारन बिम्ब। ये ८ बिम्ब वार्क्षज कहते
हैं। इन्हें दो-दो के भेद से द्विजातियों का बिम्ब कहा गया है। इसके अतिरिक्त
दृढ़मूल वाले मजबूत एवं याज्ञिक वृक्षों से बनी हुई जो प्रतिमायें हैं, वे प्रतिमादि,
कर्म के विचार से चारों वर्णों के लिये साधारण हैं। इस प्रकार की सामान्य
प्रतिमायें भोग और मोक्ष के लिये पत्थर और मिट्टी के समान कही गई हैं। तार,
हाटक (सुवर्ण) और ताँबे की बनी हुई एवं पीतल की बनी हुई इसी प्रकार श्वेत,
लाल वर्ण वाले भूमि, वस्त्र, पाषाण, धातु, वृक्ष, वज्रादि एवं समस्त रत्न भी