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सर्वकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

वर्णसंकेतानुक्रमणिका
अक्षस्थ — प्रणव | (१७.१८९)
अराच्चतुर्दश — औकार | नाभेस्त्रयोदश — ओकार
अरावसान — विसर्ग | नाभ्यपर — आकार
अरोपान्त्य — अनुस्वार | नाभ्येकादश — एकार
अष्टमाद् द्वितीयं वर्णम् — तकार | नेमि — मकार
अष्टमारगं प्राग्वर्णम् — णकार | नेमितृतीय — रेफ
आद्यमेकादशाद् — पकार | नेमि द्वितीय — यकार
एकादशादाद्यं — पकार | नेमिषष्ठम् — शकार
दशमाद् द्वितीयम् — नकार | नेमेरष्टकम् — सकार
दशमारस्थ — धकार | नेमेरेकोनविंशाख्यवर्ण — बकार
द्वितीयस्वर — आ | (१७.१८७)
नवमादपरम् — दकार | नेमेर्द्वितीयं वर्णम् — यकार
नवमाद् द्वितीयं वर्णम् — दकार | नेमेर्नवमवर्ण — टकार
नाभि — अकार | नेमेस्तृतीयं वर्णम् — रेफ
नाभितुर्य — इकार | नेमेः पञ्चमं वर्णम् — वकार
नाभितुर्यासनस्थित — वकार | पञ्चमारगम् — उकार
नाभितृतीय — इकार | लान्त — व
नाभिद्वितीय — आकार | षष्ठस्वर — ऊ
नाभिपूर्व — यकार | सान्त — ह
नाभिसप्तमवर्ण — सकार | हंसार्ण (१८.१००) — हकार
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