संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
२५६ शब्द संग्रह
सवैया
वह साँवरो नन्द को छैल अली, अब तो अति ही इतरान लगो॥१
नित घाटन बाटन कुंजन में, मोहिं देखत ही नियरान लगो॥२
रसखान बखान कहा कहिये, तकि सैनन सों मुसकान लगो॥३
तिरछी बरछी सम मारत है, दृग बान कमान सु का...
शब्द
कहँ गये प्यारे, झलक दिखा के ॥ टेक ॥
हिरदै बसी माधुरी मूरत, कस जाव प्रीतम खूँट छुड़...
बिरह अगिन ने तन मन फूँका, हिया जुड़ावो अमी प...
भई बावरी इत उत डोलौं, तन मन की सब सुद्धि...
मैं तो। हाँ पतितन को नायक, कैसे बचिहै। पन¹ बिस...
अब तो कर मैं लीन्ह सिँधौरा, तुम से मिलिहौँ दहँ ज...
बाँह गहे की लाज तुम्हीं को, का पै जावौँ तुम्हरो क...
प्रेम प्रसाद देहु निज स्वामी, मोको दासनदास बना...
रुबाई
ख़ाक आप को समझना, इकसीर² है तो यह है।
इख़लाक़³ सब से रखना, तसख़ीर⁴ है तो यह ।
सब काम अपना करना, तक़दीर⁵ के हवाले ।
नज़दीक आरिफ़ों⁶ के, तदवीर है तो यह ॥
रुबाई
वीराँ किया जब आप को बस्ती नज़र पड़ी
जब आप नेस्त हम हुए हस्ती नज़र पड़ी ॥
देखा तो ख़ाक्सारी ही आली मुक़ाम है ।
ज्यों ज्यों बलंद हम हुए पस्ती नज़र पड़ी ॥
॥ इति ॥
(१) पतित-पावन होने का प्रण । (२) रसायन । (३) आदर ...
(४) बशी करन । (५) मौज । (६) साधों ।
शुद्धि पत्र
शब्द संग्रह
पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
६ बिछुड़ बिछुड़ैँ
१५ गरीबा गरीबी
५ भाँड़े भाँड़ैँ
६ फाँसी१ फाँसी°
५ कारति कीरति
४ (जीवन- भाजराज भोजराज
चरित्र की)
१६ पड़ा पड़ी
" राग रोग
८ बिहारा विहारी
१२ तेर तेरे
५ उघाड़े उघाड़ो
१० (जीवन चरित्र को) लख लिख
१ (नोट की) श्रथ अर्थ°
३ (नोट की) सम्बन्धा सम्बन्धी
४ इद्रिन इंद्रिन
२ कैस कैसैँ
१८ मँ मैं
३ म मैं
१३ लान्हा लीन्ह्यो
नोट हू हूँ
६ रँग रंग
१७ ह हैं
२० अयौ आयौ
२ शुद्धि पत्र
पृष्ठ पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
१६६ नोट फिर मौन (चुप) फिर मौन गो. १
साधकर बैठे आर साध कर गो. २
धन दोलत और धन गो. ३
१७३ नोट खान
,, ,, मे
१७४ ४ अठौ
१७६ ४ (चरनदास की) पडित
१८८ ७ (नोट की) ह
२०७ नोट बगैर
२५० १७ बयोँ
२५४ नोट गड़ड़ी
२५५ ६ ह
२५६ १४ तसख़ीर