संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 231, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
२ सात दिनेके बाद गर्भकफकीसी गाँठके समान (कलस )
हो जाता है । ( वा० श० अ० १ श्लो० ३७ )
३ दूसरे सप्ताहके अन्तमें आकर १ ईश और वजन ई
रत्तीके बराबर लोग मानते हैं ।
४, गर्भका तीसरा सप्ताह ।
१ इस समयमें गर्भका वजन चार गेहूँके दानेके बराबर
और आकार जूएँके सामान होता है । ( १० क० )
१ इस समयमें सर तथा पैरका आकार बनने लगता है ।
लम्बाई ई इक्षतक वह जाती है ।
५, गर्भका चौथा सप्ताह ।
२. ऐसे समयमें गर्भ एक बड़ी भक्कीके समान होता है
और आकार एक कीड़ेके सहस देहा, लम्बाई ई इक्ष,
मस्तक कुछ उभरता जान पड़ता है ।
३. पहले महीनेमें गर्भ एक लोथड़ा सरीखा होता है ।
( सु० श० अ० ३ श्लो० १७ )
६, गर्भका पाँचवाँ सप्ताह ।
१ इस समयमें सर और पैरोंकी ओर कुछ उभार सा
मालूम होने लगता है ।
२. ऐसे समयमें गर्भ घन पिंड और अर्द्धके समान हो
जाना है ।
७, गर्भका छठा सप्ताह ।
१ इस समयमें शरीरस सर बड़ा होता है । हाथ पैर दूठे-
के समान होते हैं । अरिब, कान, नाक और मुँहके स्थान
( च० श० अ० ४ श्लो० ८ )