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सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished81 पृष्ठ
पृष्ठ 81स्थायी लिंक
( ६६ ) तीनों दर्शनोंके तात्पर्यका उद्घाटन
न होगा, क्यों कि-यह एकान्त रूपसे ज्ञानादि गुणोंको अन्तः-
करण सम्बन्धी मान कर आत्मा को निर्गुणमात्र कहते हैं, सब
देश में आत्मा एकसा होने से द्वैविध्य नहीं आता है।
(विद्यामार्तण्ड )
सीताराम शर्मा शास्त्री ।
यह निबन्ध "सारस्वत" अलीगढ़ के भाग ५ अङ्क २-३
में प्रकाशित हो चुका है।
The University Library,
ALLAHABAD
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Accession No. 57148
Section No. 120 / 5
(Form No. 30.)