सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दी-सांख्य दर्शन
( सांख्य-पदार्थ )
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( १ ) तत्वों का संक्षेप—(१) प्रकृति ( २ पुरुष )
व्याख्या-
(क) (१) अव्यक्त (२) व्यक्त (३) पुरुष ।
(ख) (१) प्रकृति (२) महत्तत्व (३) अहंकार (४) मन
(५) चक्षुः (६) श्रोत्र (७) घ्राण (८) रसन (६) त्वक्
(१०) वाक् (११) हस्त (१२) पाद् (१३) उपस्थ
(१४) गुद (१५) शब्द (१६) स्पर्श (१७) रूप
(१८) रस (१६) गन्ध (२०) आकाश (२१) वायु
(२२) तेज (२३) जल (२४) पृथ्वी (२५) पुरुष ।
( २ ) करण-(१) महत्तत्व (बुद्धि) (२) अहंकार (अभिमान)
(३) मन (४) चक्षुः ( नेत्र ) ( ५ ) श्रोत्र ( कान )
( ६ ) घ्राण ( नांक ) ( ७ ) रसन ( जिह्वा )
( ८ ). त्वक् ( चर्म ) ( ६ ) वाक् ( वाणी )
( १० ) पाणि ( हाथ ) ( ११ ) पाद् ( पैर )
( १२ ) पायु ( गुदा ) ( १३ ) उपस्थ ( लिङ्ग
या योनि ) ।
( ३ ) अन्तःकरणत्रय-( १ ) बुद्धि ( २ ) अहंकार ( ३ )
मन ।