सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 20, कुल 81 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्दी सांख्य दर्शन ( ५ )
प्रत्यक्ष नहीं होता । जैसे काम आदि से जिस का मन किसी
विषय में लग जाता है और उसे अच्छे प्रकाश में निकट वस्तु
भी नहीं दिखाई देती । ( ४ ) अत्यन्त सूक्ष्म होने से भी
वस्तु प्रत्यक्ष नहीं होती । जैसे पृथिवी आदि के परमाणु नेत्र
के समीप भी रहते हैं, किन्तु वे सूक्ष्मता के कारण दिखाई
नहीं देते । ( ५ ) व्यवधान या किसी वस्तु के बीच में आने
से वस्तु प्रतीत नहीं होती । जैसे दीवार आदि के बीच में
आ जाने से राजा की रानी आदि दिखाई न दे । ( ६ )
अभिभव या तिरस्कार से प्रत्यक्ष नहीं होता । जैसे दिन में
सूर्य की किरणों से तिरस्कृत होने के कारण ग्रह नक्षत्र नहीं
दिखाई देते । ( ७ ) समानाभिहार या समान वस्तु में
मिल जाने से प्रत्यक्ष नहीं होता । जैसे जलाशय में मेघ से
गिरे हुये जल के विन्दु नहीं दिखाई देते । ( ८ ) इस श्लोक
में जो “च” कार दिया है, इस से अनुद्भव ( अप्रकटता )
भी यहां समझना । जैसे दूध आदि की अवस्था में दही आदि
को नहीं देखता ।६।
प्रधान आदि के प्रत्यक्ष न होने का कारण
सौक्ष्म्यात्तदनुपलब्धिर्नाभावात्,कार्यतस्तदुपलब्धेः
महदादि तच्चकार्यं प्रकृतिसरूपं विरूपंच ॥ ८ ॥
सूक्ष्मता के कारण प्रधान आदि वस्तुओं का प्रत्यक्ष नहीं
होता है, किन्तु उनके अभाव या न होने से नहीं । क्योंकि
उनकी उपलब्धि कार्य से होती है, और वह कार्य महत् आदि
है, जो प्रकृति के समान रूप और विलक्षण रूपवाला है ॥८॥
सत्कार्यवाद के साधक
असदकरणादुपादानग्रहणात् सर्वसंभवाभावात् ।