सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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यह अणिमा आदि हमारा सदाका ऐश्वर्य्य है, तद्रूप अस्मिता
८ प्रकार की होती है।
(इ) राग के भेद-[ ५ दिव्य ] ( १ ) शब्द ( २ ) स्पर्श
( ३ ) रूप ( ४ ) रस ( ५ ) गन्ध [ ५ अद्दिव्य ]
( ६ ) शब्द ( ७ ) स्पर्श ( ८ ) रूप ( ६ ) रस
( १० ) गन्ध ।
(ई) द्वेष के भेद-(१० रागों के द्वेष और आठ सिद्धियों
के द्वेष मिल कर १८ द्वेष होते हैं। अर्थात्-दिव्य
अदिव्य भेद से १० प्रकार के शब्द आदि विषय
परस्पर से उपहत होकर द्वेष के विषय होते हैं
या इन पर द्वेष होता है, अतः द्वेष १० प्रकार
का होता है, तथा ८ अणिमा आदि सिद्धियें
स्वरूप से ही [ अपने आप ही ] कोपनीय होती
हैं या इनपर कोप होता है, अतः इनके कारण
से द्वेष भी ८ प्रकार का होता है । इस प्रकार
द्वेष १८ प्रकार का है।
(उ) अभिनिवेश के भेद-अणिमा आदि ८ ऐश्वर्य
और शब्द आदि १० विषय, कुल १८ विषयों
या उपायों को प्राप्त हो कर देवताओं को भय
होता है कि इन्हें असुर न छीन लें, इस प्रकार
भय का विषय १८ प्रकार का होने से भय या
अभिनिवेश १८ प्रकार का होता है।
( ६ )
(ख) अशक्तिएं-[ ११ इन्द्रियवधजन्य- ] ( १ ) मन्दता
(७) (८) (९)
(०२ ) अन्धता ( ३ ) वधिरता ( ४ ) अजिघ्रता