सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

सङ्गीतदर्पण (दामोदर पण्डित - तंजौर सरस्वती महल संस्करण, सङ्गीत एवं नाट्य लक्षण)

Sangita Darpana of Damodara Pandita (TMSSML Edition)

दामोदर पण्डित (सम्पादक: के. वासुदेव शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 75, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 75

46
गौरी कृशा कोकिलकण्ठनादा गीतच्छलेनात्मपतिं स्मरन्ती ।
आदाय वीणां मलिना रुदन्ती मल्लारिका यौवन दूनचित्ता ॥ २६३
धनिरीगमध इति मल्लारिका ॥ ३२ ॥
(262-263) 'Mallari' lakshana.
(சு. 262-263) 'மல்லாரி' லக்ஷணம்.
देशकारी तु संपूर्णा षड्जन्यास ग्रहांशका ।
मूर्च्छना प्रथमा ज्ञेया वराटीमिश्रिताभवेत् ॥ २६४ ॥
उदाहरणम् ।
भर्त्रासमं केलिरसं सुकेशी सर्वाङ्गपूर्णा कमलायताक्षी ।
पीनस्तनी रुक्मतनुः सुवेशा संपूर्णचन्द्रानन देशकारी ॥
सरिगमपधनिस इति देशकारी ॥ ३३ ॥
(263-264) 'Deshakari' lakshana.
(சு. 263-264) 'தேசகாரி' லக்ஷணம்.
षड्जग्रहांशकन्यासा भूपाली कथिता बुधैः ।
मूर्च्छना प्रथमा यत्र संपूर्णा शान्तिके रसे
कैचित्तुरीयहीनेय औडवा परिकीर्तिता ॥ २६६ ॥
गौरद्युतिः कुङ्कुमलिप्तदेहा तुङ्गस्तनी चन्द्रमुखा मनोज्ञा ।
भर्तुः स्मरन्ती विरहेण दूना भूपालिकेयं रसशान्तियुक्ता ॥
सरिगमपधनिस इति भूपाली ॥ ३४ ॥
(266-267) 'Bhupali' lakshana.
(சு. 266-267) 'பூபாளி' லக்ஷணம்.