सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाग्य से अधिक कुछ नहीं मिलता। भाग्य से ही श्रेष्ठ
पत्नी, अच्छा भोजन और विपुल सम्पत्ति प्राप्त होती है। इन्हें जितना
और जैसा मिले, उसी पर संतोष करना चाहिए। दूसरी ओर विद्या
संग्रह की कोई सीमा नहीं होती। जप और दान करने-कराने से यश
प्राप्त होता है।
विप्रयोर्विप्रवह्व्योश्च दम्पत्योः स्वामिभृत्ययोः।
अंतरेण न गंतव्यं हलस्य वृषभस्य च॥
दो ब्राह्मणों के बीच से, अग्नि और ब्राह्मण के बीच से, पति
और पत्नी के बीच से, स्वामी और सेवक के बीच से तथा हल
और बैल के बीच से नहीं गुजरना चाहिए॥5॥
जीवन में सजगता बहुत जरूरी है इसीलिए चाणक्य का
कहना है कि दो ब्राह्मणों के बीच से गुजरने का अर्थ यही है कि
आप उनके वाद-विवाद में विघ्न डाल रहे हैं। अतः कभी उनके
बीच से होकर न निकलें। ब्राह्मण और अग्नि के बीच से गुजरने
का अर्थ यही है कि आप उनके अग्निहोत्र में विघ्न डाल रहे
हैं। पति-पत्नी तथा स्वामी और सेवक के बीच में जब
वार्तालाप चल रहा हो, तब बीच से गुजरकर आप उनकी बातों
में विघ्न डालते हैं।
इसी तरह बैल और हल के बीच से निकलते वक्त चोट लग
जाने का भय बना रहता है। अतः इन बातों का ध्यान रखना
चाहिए।
पादाभ्यां न स्पृशेदाग्नि गुरुं ब्राह्मणमेव च।
नैव गां न कुमारीं च न वृद्धं न शिशुं तथा॥
पैर से अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गौ, कन्या, वृद्ध और बालक को
कभी नहीं छूना चाहिए॥6॥
इन्हें पैर से स्पर्श करने पर पाप लगता है क्योंकि ये
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