सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबल्लभ भाई पटेल ने किया था, कुछ वैसा ही दुष्कर
कार्य आचार्य चाणक्य ने, आज की परिस्थितियों से सर्वथा
विपरीत स्थिति में तब किया था, जब यह कार्य सर्वथा असम्भव
समझा जाता था। तब इस प्रकार की कोई कल्पना ही नहीं कर
सकता था, परंतु आचार्य चाणक्य ने तब असम्भव को भी सम्भव
कर दिखाया था। 'असम्भव' शब्द उनके कोष में नहीं था।
बड़ी-से-बड़ी बाधा को वे नगण्य समझते थे।
उस समय विदेशी आक्रमणकारियों में सर्वाधिक शक्तिशाली
योद्धा यूनान का राजा सिकन्दर था। सिकन्दर ने जब भारत पर
आक्रमण किया तो यहां के कुछ देशद्रोही राजाओं ने अपने स्वार्थ
के लिए उसका साथ दिया था, परंतु आचार्य चाणक्य ने पश्चिमोत्तर
भारत के कुछ देशप्रेमी राजाओं को संगठित कर आततायी सिकन्दर
को जबरदस्त टक्कर दी और चन्द्रगुप्त जैसा एक महानायक देकर
अखण्ड भारत की नींव रख दी। चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में उन्होंने भारत
को एक झण्डे के नीचे संगठित करने का सफल महायज्ञ सम्पन्न
किया। यह उन्हीं की कुशल राजनीति का परिणाम था कि सिकन्दर
के बाद सम्राट चन्द्रगुप्त से टक्कर लेने का साहस फिर कोई
आक्रमणकारी नहीं कर सका। भारत के स्वाभिमान की रक्षा में
आचार्य चाणक्य अविचल चट्टान की भांति उठ खड़े हुए थे।
आचार्य चाणक्य को 'कौटिल्य' और 'विष्णुगुप्त' के नामों से
भी जाना जाता है। चणक पुत्र होने के कारण उन्हें चाणक्य नाम
मिला था और कुटिल राजनीतिज्ञ होने के कारण उन्हें 'कौटिल्य'
के नाम से सम्बोधित किया गया। उनको पिता के द्वारा दिया गया
वास्तविक नाम 'विष्णुगुप्त' था। कुछ विद्वानों का मत है कि कुटिल
गोत्र के वंशज और अर्थशास्त्र ग्रन्थ के प्रणेता होने के कारण चाणक्य
को 'कौटिल्य' कहा जाता है।
आचार्य चाणक्य केवल अर्थशास्त्र के ही पंडित नहीं थे, वरन्
दूसरे शास्त्रों और शस्त्र-विद्याओं के भी वे पूर्ण विद्वान थे। वे
कूटनीतिक योद्धा और असाधारण कोटि के कुशल नीतिज्ञ