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सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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हो जाता, किसी से कोई चीज मांगकर उसे वापस देने
से कोई दानी नहीं बन जाता, परंतु आज की स्थिति तो यही है
कि आदमी समाज की विषम परिस्थितियों के मध्य
कीड़े-मकोड़ों की भांति अपना जीवन काट रहा है।
न विप्रपादोदक-कर्दमानि, न वेदशास्त्र-ध्वनि-गर्जितानि।
स्वाहा-स्वधाकार विवर्जितानि, श्मशानतुल्यानि गृहाणि तानि॥
जहां ब्राह्मणों के चरण नहीं धोए जाते अर्थात उनका आदर नहीं
किया जाता, जहां वेद-शास्त्रों के श्लोकों की ध्वनि नहीं गूंजती
तथा यज्ञ आदि से देव-पूजन नहीं किया जाता, वे घर श्मशान के
समान हैं।।10।।
जिन घरों में ब्राह्मणों के पैरों को धुलाने वाले जल से कीचड़
नहीं हो जाता, जहां वेदादि शास्त्रों की ध्वनियां नहीं गूंजतीं, वे घर
श्मशान के समान हैं।
सत्यं माता पिता ज्ञानं धर्मो भ्राता दया स्व सा।
शान्तिः पत्नी क्षमा पुत्रः षडेते मम बान्धवाः॥
सत्य मेरी माता है, पिता मेरा ज्ञान है, धर्म मेरा भाई है, दया मेरी
मित्र है, शान्ति मेरी पत्नी है और क्षमा मेरा पुत्र है, ये छः मेरे
बंधु-बांधव हैं।।11।।
मोह-माया से विरक्त होने के उपरान्त व्यक्ति अपने सभी
भौतिक तथा सांसारिक रिश्ते-नातों को खत्म कर लेता है, तभी
सत्य को वह अपनी माता, ज्ञान को पिता, धर्म को भाई, दया
को मित्र, शान्ति को स्त्री और क्षमा को अपना पुत्र बताता है।
अनित्यानि शरीराणि विभवो नैव शाश्वतः।
नित्यं सन्निहितो मृत्युः कर्तव्यो धर्मसंग्रहः॥
सभी शरीर नाशवान हैं, सभी धन-सम्पत्तियां
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CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri