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सर्वकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 424 में से

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पृष्ठ 102

९२ श्रीसाम्बपुराणम्

नक्षत्र का अधिपति सोम है (चन्द्र है)। ग्रहराज हैं—दिवाकर। चन्द्रमा अग्नि तथा जलमय है॥४४॥

आदित्यः पठ्यते ब्रह्मा विष्णुस्तेषां च चन्द्रमाः ।
माहेश्वरस्तु विज्ञेयस्तृतीयोऽङ्गारको ग्रहः ॥४५॥

रवि हैं—ब्रह्मा, विष्णु हैं—चन्द्रमा एवं महेश्वर के पुत्र हैं—मंगल॥४५॥

कश्यपस्य सुतः सूर्यः सोमो धर्मसुतः स्मृतः ।
देवासुरगुरू द्वौ तु भानुमन्तौ महाग्रहौ ॥४६॥

कश्यप के पुत्र सूर्य हैं एवं चन्द्र धर्मपुत्र हैं। देव तथा असुरों के गुरु क्रमशः बृहस्पति तथा शुक्र हैं। ये उज्ज्वल महाग्रह हैं॥४६॥

प्रजापतिसुतावेतावुभौ शुक्रबृहस्पतिः ।
बुधः सोमात्मजः श्रीमान् सूर्यपुत्रः शनैश्चरः ॥४७॥

प्रजापति के पुत्र शुक्र तथा बृहस्पति हैं। बुध है—चन्द्रपुत्र तथा श्रीमान् शनैश्चर सूर्यपुत्र हैं॥४७॥

सैंहिकेयः स्मृतो राहुः केतुश्च ब्रह्मणः सुतः ।
सर्वेषां तु ग्रहाणां वै ह्यधस्ताच्चरते रविः ॥४८॥

राहु को सिंहिका का पुत्र तथा केतु को ब्रह्मा का पुत्र कहा गया है। समस्त ग्रहों के मध्य निम्न भाग में विचरणशील हैं—सूर्य॥४८॥

रवेरूर्ध्वं स्थितः सोमः सोमान्नक्षत्रमण्डलम् ।
नक्षत्रेभ्यो बुधस्तूर्ध्वं बुधादूर्ध्वं तु भार्गवः ॥४९॥
तस्मादङ्गारकश्चोर्ध्वं तस्य चोर्ध्वं बृहस्पतिः ।
तस्माच्छनैश्चरश्चोर्ध्वं तस्योर्ध्वमृषिमण्डलम् ॥५०॥

रवि के ऊपर सोम (चन्द्र) स्थित हैं। सोम के ऊपर नक्षत्रमण्डल है। नक्षत्र के ऊपर शुक्र हैं और उसके ऊर्ध्व में है—मंगल। उसके ऊर्ध्व में है—बृहस्पति। उसके ऊर्ध्व में शनि तथा उसके ऊर्ध्व में ऋषिमण्डल विराजमान है॥४९-५०॥

ऋषिभ्यश्च ध्रुवस्योर्ध्वमासनं कथितं बुधैः ।
आदित्यनिलये राहुः कदाचित् सोममार्गगः ॥५१॥
सूर्यमण्डलसंस्थस्तु केतुर्नित्यं प्रसर्पति ।
नवयोजनसाहस्रो विस्तारो भास्करस्य तु ॥५२॥
विस्तारात् त्रिगुणं चास्य परिणाहेन मण्डलम् ।
द्विगुणः सूर्यविस्ताराद् विस्तारः शशिनः स्मृतः ॥५३॥