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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 93

चंद्र अंतरिक्ष में अपनी किरणों के साथ गतिशील हैं. सूर्य की किरणें सुनहरी और
चमकीली हैं. हमारी इंद्रियां उन्हें नहीं पकड़ सकतीं. हे स्वर्गलोक! व पृथ्वीलोक! आप हमारी
प्रार्थना स्वीकार कीजिए. (९)
प्रति प्रियतम ॐ रथं वृषणं वसुवाहनम्.
स्तोता वामश्विनावृषि स्तोमेभिर्भूषति प्रति माध्वी सम श्रुत ॐ हवम्.. (१०)
हे अश्विनीकुमारो! आप का रथ अत्यंत प्रिय व बलवान है. वह धन ढोता है. उपासक
ऋषि अपनी प्रार्थनाओं से उसे सुशोभित करते हैं. आप दोनों मधुर विद्याओं के ज्ञाता हैं. आप
हमारी प्रार्थनाएं सुनिए. (१०)
आठवां खंड
आ ते अग्न इधीमहि द्युमन्तं देवाजरम्.
यद्ध स्या ते पनीयसी समिद्दीदयति द्यवीष ॐ स्तोतृभ्य आ भर.. (१)
हे अग्नि! आप अजर (बुढ़ापे से मुक्त) हैं. आप प्रकाशमान हैं. हम आप को प्रज्वलित
करते हैं. आप स्वर्गलोक को प्रकाशित करते हैं. आप उपासकों को भरपूर धन दीजिए. (१)
अग्निं न स्ववृक्तिभिर्होतारं त्वा वृणीमहे.
शीरं पावकशोचिषं वि वो मदे यज्ञेषु स्तीर्णबर्हिषं विवक्षसे.. (२)
हे अग्नि! अच्छी प्रार्थनाओं से आप को हवि दी जाती है. यज्ञ में आप के लिए कुश का
आसन बिछाया जाता है. आप सर्वत्र मौजूद हैं. आप प्रकाशमान व महान हैं. हम विशेष
प्रसन्नता के साथ आप की उपासना करते हैं. (२)
महे नो अद्य बोधयोषो राये दिवित्मती.
यथा चिन्नो अबोधयः सत्यश्रवसि वाय्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (३)
हे उषा! आप पहले भी हमें जाग्रत करती रही हैं. आप हमें अब भी जाग्रत कीजिए.
आप धनप्राप्ति के लिए हमें जाग्रत कीजिए. आप प्रकाशयुक्त और श्रेष्ठ विधि (अच्छी तरह)
से उत्पन्न हैं. आप वय के पुत्र सत्यश्रवा पर कृपा दृष्टि रखिए. (३)
भद्रं नो अपि वातय मनो दक्षमुत क्रतुम्.
अथा ते सख्ये अन्धसो वि वो मदे रणा गावो न यवसे विवक्षसे.. (४)
हे सोम! सोमरस से हमारा मन प्रसन्न हो जाता है. आप हमारे प्रसन्न मन को बल
दीजिए. क्रियाशील बनाने की कृपा कीजिए. आप हमें हितकारी शक्ति दीजिए. श्रेष्ठ बनाइए.
आप हमें मित्रता के लिए प्रेरित कीजिए. हमारा आप से वैसा ही सखा भाव हो जाए, जैसा
गाय का घास से हो जाता है. (४)
क्रत्वा महाँ अनुष्वधं भीम आ वावृते शवः.
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