सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 89, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपर भी वे सब प्राणियों के स्वामी हैं. (९)
सखाय आ शिषामहे ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे. स्तुष ऊ षु वो नृतमाय धृष्णवे.. (१०)
हे सखाओ! इंद्र वज्रवाले हैं. हम प्रार्थनाओं से उन की उपासना करते हैं. हम ब्रह्मज्ञानी
इंद्र से आशीष चाहते हैं. वे सर्वोत्तम पराक्रमी व शत्रुओं को मात देने वाले हैं. हम सब के हित
हेतु उन की उपासना करते हैं. (१०)
पांचवां खंड
गृणे तदिन्द्र ते शव उपमां देवतातये. यद्ध २४ सि वृत्रमोजसा शचीपते.. (१)
हे इंद्र (शचीपति)! हम पास ही हो रहे इस यज्ञ में आप की महिमा की उपासना करते
हैं. आप अपने ओज से वृत्रासुर का नाश कर सके. (१)
यस्य त्यच्छम्बरं मदे दिवोदासाय रन्धयन्. अय २४ स सोम इन्द्र ते सुतः पिब.. (२)
हे इंद्र! आप सोमरस पीजिए. सोमरस से मदमस्त हो कर ही आप ने दिवोदास के लिए
शंबर का नाश किया. (२)
एन्द्र नो गधि प्रिय सत्राजिदगोह्य. गिरिं विश्वतः पृथुः पतिर्दिवः.. (३)
हे इंद्र! आप सभी को प्रिय व शत्रुजित् हैं. आप को कोई नहीं हरा सकता. आप गिरि
जैसे विशाल व स्वर्गलोक के स्वामी हैं. आप विश्व के सभी वैभव हमें प्रदान कराने के लिए
हमारे पास पृथ्वी पर पधारने की कृपा कीजिए. (३)
य इन्द्र सोमपातमो मदः शविष्ठ चेतति. येना ह २४ सि न्या ३ त्रिणं तमीमहे.. (४)
हे इंद्र! आप अधिक सोमरस का पान करते हैं. आप अतीव बलशाली व बहुत अधिक
ऊर्जस्वी हैं. इसी ऊर्जा (उत्साह) से आप दुश्मनों का नाश कर पाते हैं. हम इसलिए आप की
उपासना करते हैं. (४)
तुचे तुनाय तत्सु नो द्राघीय आयुर्जीवसे. आदित्यासः सुमहसः कृणोतन.. (५)
हे आदित्यो! आप महान हैं. आप हमारी संतान को लंबी आयु दीजिए. आप हमारी
संतान की संतान को दीर्घ आयु प्रदान करने की कृपा कीजिए. (५)
वेत्था हि निर्ऋतीनां वज्रहस्त परिवृजम्. अहरहः शुन्ध्युः परिपदामिव.. (६)
हे इंद्र! आप विघ्नों को दूर करना जानते हैं. आप पवित्रतापूर्वक आपत्तियों का
निराकरण करते हैं. आप रोग निवारक (चिकित्सक) मनुष्य के समान सभी आपत्तियों को दूर
कर सकते हैं. (६)
अपामीवामप सिध्मप सेधत दुर्मतिम्. आदित्यासो युयोतना नो अ २४ हसः.. (७)
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