सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 59, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! आप के लिए हम ने स्तुतियां रची हैं. आप बलशाली हैं. सब का पालनपोषण
करने वाले हैं. वे स्तुतियां आप तक पहुंचीं. सोम पीने वाले इंद्र ने उन का भी सेवन किया.
(२)
सुनीथो घा स मर्त्यो यं मरुतो यमर्यमा. मित्रास्पान्त्यद्रुहः.. (३)
हे इंद्र! द्रोह (द्वेष) न करने वाले मरुत्, अर्यमा और मित्र देवता जिस की रक्षा करते हैं,
वह यजमान निश्चय ही अच्छी राह पर चलने वाला होता है. (३)
यद्दीडाविन्द्र यत्स्थिरे यत्पर्शाने पराभृतम्. वसु स्पार्हं तदा भर.. (४)
हे इंद्र! आप के पास जो अचंचल और स्थिर धन है, ऐसा ही पुरुषार्थ वाला धन हमें
प्रदान कीजिए. (४)
श्रुतं वो वृत्रहन्तमं प्र शर्धं चर्षणीनाम्. आशिषे राधसे महे.. (५)
वृत्रासुर को मारने वाले बल की महिमा सब ने सुनी है. मनुष्य को अच्छा धन प्राप्त
कराने की इच्छा से वह बल आप को देता हूं. (५)
अरं त इन्द्र श्रवसे गमेम शूर त्वावतः. अरं ॐ शक्र परेमणि.. (६)
हे इंद्र! आप वीर हैं. आप की प्रसिद्धि हम ने कई बार सुनी है. आप जैसे श्रेष्ठ दूसरे
देवता की प्रसिद्धि भी हमें प्राप्त हो. (६)
धानावन्तं करम्भिणमपूपवन्तमुक्थिनम्. इन्द्र प्रातर्जुषस्व नः.. (७)
हे इंद्र! दही और भुजे हुए सत्तूओं वाले यज्ञ के पुरोडाश (प्रसाद) की हवि हम मंत्र के
साथ समर्पित कर रहे हैं. आप इस सोम को प्रातःकाल ग्रहण कीजिए. (७)
अपां फेनेन नमुचेः शिर इन्द्रोदवर्तयः. विश्वा यदजय स्पृधः.. (८)
जब डाह करने वाली राक्षसों की सारी सेना को इंद्र ने हरा दिया तब आप ने जल के
झाग से नमुचि राक्षस का सिर तोड़ (काट) दिया. (८)
इमे त इन्द्र सोमाः सुतासो ये च सोत्वाः. तेषां मत्स्व प्रभूवसो.. (९)
हे इंद्र! आप के लिए यह सोमरस निचोड़ व छान कर तैयार किया है. आप बहुत
धनवान हैं. आप सोमरस से प्रसन्न होने की कृपा करें. (९)
तुभ्य ॐ सुतासः सोमाः स्तीर्णं बर्हिर्विभावसो. स्तोतृभ्य इन्द्र मृडय.. (१०)
हे इंद्र! आप तेजस्वी व धनवान हैं. आसन पर शुद्ध सोमरस रखा हुआ है. आप
कुशासन पर बैठिए. सोमरस पीजिए. स्तुति करने वालों को सुख (अपनी कृपा) दीजिए.
(१०)
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