सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 57, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! आप अनेक नामों वाले हैं. अनेक लोग आप की स्तुति करते हैं. आप जहां
पधारते हैं, वहां हम गौओं की इच्छा से आप की प्रार्थना करते हैं. (४)
पावकाः नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती. यज्ञं वष्टु धियावसुः.. (५)
सरस्वती पवित्र करने वाली, पोषण देने वाली व बुद्धि से धन देने वाली हैं. विद्या की वे
देवी हमारे यज्ञ को सफल बनाएं. (५)
क इमं नाहुषीष्वा इन्द्र ॐ सोमस्य तर्पयात्. स नो वसून्या भरात्.. (६)
मनुष्यों में ऐसी क्षमता कहां, जो इंद्र को तृप्त कर सकें? वे हमारे यज्ञ में तृप्त हों तथा
हमें धन प्रदान करें. (६)
आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (७)
हे इंद्र! आप आइए. हम ने आप के लिए सोमरस निकाला है. आप उसे पीजिए. हम ने
आप के लिए कुश का आसन बिछाया है. आप उस पर विराजमान होइए. (७)
महि त्रीणामवरस्तु द्युक्षं मित्रस्यार्यम्णः. दुराधर्षं वरुणस्य.. (८)
इंद्र, अर्यमा और वरुण—इन तीनों देवताओं का तेजस्वी संरक्षण हमें मिले ताकि हम
शत्रुओं को हरा सकें. (८)
त्वावतः पुरूवसो वयमिन्द्र प्रणेतः. स्मसि स्थातर्हरीणाम्.. (९)
हे इंद्र! आप बहुत धनवान, श्रेष्ठ कर्म करने वाले व हरि नामक घोड़े वाले हैं. हमारी रक्षा
करिए. हम आप के अपने हैं. (९)
नौवां खंड
उत्त्वा मन्दन्तु सोमाः कृणुष्व राधो अद्रिवः. अव ब्रह्मद्विषो जहि.. (१)
हे इंद्र! सोमरस आप को आनंद दे. हे वज्रधारी इंद्र! आप हम पर धन बरसाइए. आप
ब्राह्मणों के द्वेषियों का नाश कीजिए. (१)
गिर्वणः पाहि नः सुतं मधोर्धाराभिरज्यसे. इन्द्र त्वादातमिद्यशः.. (२)
हे इंद्र! आप स्तुति करने योग्य हैं. आप हमारे छाने हुए इस सोमरस को पीजिए. आप
को सोम की धारा से सींचा जाता है. हमें आप की कृपा से शुद्ध किया हुआ अन्न (धन) प्राप्त
होता है. (२)
सदा व इन्द्रश्चर्कृषदा उपो नु स सपर्यन्. न देवो वृतः शूर इन्द्रः.. (३)
हे यजमानो! इंद्र हमेशा आप के पास हैं. वे पूजा किए जाने पर आप के यज्ञ की ओर
आते हैं. हम ने महान इंद्र का वरण किया है. (३)
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