सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! आप पर्वत में रहने वाले शेर के समान भयंकर हैं. दूर से यहां आ कर दूर तक
मारक तीखे वज्र से शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. आप लड़ाकू शत्रुओं को दूर
करने की कृपा कीजिए. (२५)
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः.
स्थिरैरंगैस्तुष्टुवा ॐ सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः.. (२६)
हे देवगणो! आप की कृपा से कानों से कल्याणकारी वचन सुनें, आंखों से मंगलमय
दृश्य देखने को मिलें. हम स्वस्थ हाथपैर और अंगों से आप की स्तुति कर सकें. आप
देवताओं की कृपा से हमें जो भी आयु प्राप्त हुई है, उस का हम स्तुतिपूर्वक सदुपयोग कर
सकें. (२६)
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः.
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु.. (२७)
इंद्र हमारा कल्याण करने की कृपा करें. सर्वज्ञाता पूषा हमारा कल्याण करने की कृपा
करें. अहिंसक अस्त्रशस्त्र वाले गरुड़ व ज्ञान धारण करने वाले बृहस्पति हमारा कल्याण करने
की कृपा करें. (२७)
(सामवेद पूर्ण)