सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 30, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वाचिक
आग्नेय पर्व
पहला अध्याय
पहला खंड
अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये. नि होता सत्सि बर्हिषि.. (१)
हे अग्नि! हम सब आप की स्तुति (पूजा) करते हैं. यज्ञ में आप को आमंत्रित करते हैं.
आप आ कर कुश (घास) के आसन पर बैठिए. आप हवि (अग्नि में डाली जाने वाली पवित्र
चीजें) देवताओं तक पहुंचाइए. (यह माना जाता है कि हम अग्नि में जो पदार्थ डालते हैं, वे
अग्नि के द्वारा मंत्र से संबंधित देवता तक पहुंचते हैं). (१)
त्वमग्ने यज्ञाना १४ होता विश्वेषा १४ हितः. देवेभिर्मानुषे जने.. (२)
हे अग्नि! आप यज्ञों के पुरोहित हैं. आप सब का कल्याण करने वाले हैं. देवताओं ने ही
आप को मनुष्यों (जनों) के बीच में स्थापित किया है. (२)
अग्निं दूत वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. (३)
हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले हैं. आप धन के स्वामी हैं. इस यज्ञ को अच्छी
तरह करने के लिए हम आप को दूत मान कर भेज रहे हैं. (हवि अग्नि के माध्यम से संबंधित
देवता तक पहुंचती है, इसलिए अग्नि को देवता का दूत माना जाता है). (३)
अग्निर्वृत्राणि जङ्घनद् द्रविणस्युर्विपन्यया. समिद्धः शुक्र आहुतः.. (४)
हे अग्नि! आप अपने पूजकों को धन देने वाले हैं. समिधा (जिस से यज्ञ की अग्नि
प्रज्वलित की जाती है) से आप को अच्छी तरह प्रकाशित किया गया है. आप हमारी स्तुति से
प्रसन्न होइए. यज्ञ में विघ्न डालने वालों (राक्षसों एवं दुष्ट प्रवृत्तियों) को नष्ट कीजिए. (४)
प्रेष्ठं वो अतिथि १४ स्तुषे मित्रमिव प्रियम्. अग्ने रथं न वेद्यम्.. (५)
हे अग्नि! आप पूजकों को धन देने वाले हैं. उन्हें मित्र की तरह बहुत प्रिय हैं. मेहमान
की तरह पूजा करने योग्य हैं. आप हमारी पूजा से प्रसन्न होइए. (५)
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