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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 292, कुल 310 में से

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पृष्ठ 292

बीसवां अध्याय
पहला खंड
प्रास्य धारा अक्षरन्वृष्णः सुतस्यौजसः. देवाँ अनु प्रभूषतः.. (१)
हे सोम! आप का रस बलवर्द्धक है. देवताओं पर अनुकूल प्रभाव डालने वाला है.
सोमरस की धाराएं वेगवती व द्रोणकलश में सुशोभित हो रही हैं. (१)
सप्तिं मृजन्ति वेधसो गृणन्तः कारवो गिरा. ज्योतिर्जज्ञानमुक्थ्यम्.. (२)
हे सोम! आप प्रकाशमान, उपासना के योग्य, अश्व के समान वेगशाली और विद्वान् हैं.
अध्वर्युगण (पुरोहित) वाणीमय प्रार्थनाओं से सोमरस को परिष्कृत करते हैं. (२)
सुसहा सोम तानि ते पुनानाय प्रभूवसो. वर्धा समुद्रमुक्थ्य.. (३)
हे सोम! आप धनवान, उपासना के योग्य, पवित्र, बहुत शक्तिशाली हैं और रक्षक हैं.
आप समुद्र के समान इस पात्र को भर देने की कृपा कीजिए. (३)
एष ब्रह्मा य ऋत्विय इन्द्रो नाम श्रुतो गृणे.. (४)
हे इंद्र! आप मौसम के अनुसार बढ़ोतरी पाते हैं. आप यज्ञ जैसे कामों से बढ़ोतरी पाते
हैं. आप बुद्धिमान और ज्ञानी हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (४)
त्वामिच्छवसस्पते यन्ति गिरो न संयतः.. (५)
हे इंद्र! आप महान व बलवान हैं. सदाचारी पुरुष के पास जैसे कल्याण हेतु जाया जाता
है, वैसे ही हमारी वाणीमय प्रार्थनाएं आप के पास पहुंचती हैं. (५)
वि स्रुतयो यथा पथा इन्द्र त्वद्यन्तु रातयः.. (६)
हे इंद्र! राजपथ से जैसे दूसरे पथ मिलते हैं, वैसे ही आप से भांतिभांति के दान अनुदान
प्राप्त होते हैं. (६)
आ त्वा रथं यथोतये सुम्नाय वर्तयामसि.
तुविकूर्मिमृतीषहमिन्द्रं शविष्ठं सत्पतिम्.. (७)
हे इंद्र! आप अच्छे मन वाले हैं. आप सत्पति हैं. आप श्रेष्ठ मार्गगामी हैं. हम सुख और
कल्याण के लिए उसी प्रकार आप की उपासना करते हैं, जिस प्रकार रथ की परिक्रमा की
जाती है. (७)
तुविशुष्म तुविक्रतो शचीवो विश्श्या मते. आ पप्राथ महित्वना.. (८)
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