सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 287, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं. आप यजमानों को भरपूर अन्न प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३)
महे नो अद्य बोधयोषो राये दिवित्मती.
यथा चिन्नो अबोधयः सत्यश्रवसि वाय्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (४)
हे उषा! आप प्रकाशवती हैं. आप हम सभी को पहले की तरह आज भी बोधित
(जाग्रत) करने की कृपा कीजिए. आप हम पर भी वैसी ही कृपा कीजिए, जैसी आप ने व्यय
के पुत्र सत्यश्रवा पर की. जैसा आप ने उन्हें (सत्यश्रवा को) जाग्रत किया, वैसे ही हमें भी
जाग्रत करने की कृपा कीजिए. (४)
या सुनीथे शौचद्रथे व्यौच्छो दुहितर्दिवः.
या व्युच्छ सहीयसि सत्यश्रवसि वाय्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (५)
हे उषा! आप स्वर्गलोक की दुहिता (पुत्री) हैं. आप शुचद्रथ के पुत्र सुनीथ हेतु अंधेरे को
भगा कर प्रकट हुईं. आपने सुनीथ पर जैसी कृपा की, वैसी ही आप व्यय के पुत्र सत्यश्रवा
पर भी कीजिए. (५)
सा नो अद्याभरद्वसुर्व्युच्छा दुहितर्दिवः.
यो व्यौच्छः सहीयसि सत्यश्रवसि वाय्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (६)
हे उषा! आप स्वर्गलोक की दुहिता (बेटी) हैं. आप हमें भरपूर धन देने व आज हमारे
अंधेरे (प्राकृतिक और अज्ञान रूप दोनों) को नष्ट करने की कृपा कीजिए. आप सत्यस्वरूपा
हैं. आप व्यय के पुत्र सत्यश्रवा पर अपनी कृपा कीजिए. (६)
प्रति प्रियतम ꣳ रथं वृषणं वसुवाहनम्.
स्तोता वामश्विनावृषि स्तोमेभिर्भूषति प्रति माध्वी मम श्रुत ꣳ हवम्.. (७)
हे अश्विनीकुमारो! आप का रथ वैभव व पराक्रम धारण करता है. आप का रथ
उपासकों की प्रार्थना से सुशोभित होता है. आप हमारी प्रार्थनाओं को सुनने की कृपा
कीजिए. (७)
अत्यायातमश्विना तिरो विश्वा अह ꣳ सना.
दस्रा हिरण्यवर्तनी सुषुम्णा सिन्धुवाहसा माध्वी मम श्रुत ꣳ हवम्.. (८)
हे अश्विनीकुमारो! आप दूसरों का अतिक्रमण कर के (लांघ कर) हमारे पास पधारने
की कृपा कीजिए. आप शत्रुनाशक हैं. आप की कृपा से हम अपने शत्रु पर विजय पा सकें.
आप सोने के रथ वाले हैं. आप धनवान हैं. आप नदी के समान बहते हैं. आप हमारी
प्रार्थनाओं को सुनने की कृपा कीजिए. (८)
आ नो रत्नानि बिभ्रतावश्विना गच्छतं युवम्.
रुद्रा हिरण्यवर्तनी जुषाणा वाजिनीवसू माध्वी मम श्रुत ꣳ हवम्.. (९)
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