सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 285, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंविश्वा च न उपमिमीहि मानुष वसूनि चर्षणिभ्य आ.. (१४)
हे इंद्र! आप के धन कभी भी हमारे लिए हानिकारक न हों. आप के रक्षा साधन भी
कभी हमें हानि न पहुंचाएं. आप संसार के शरणदाता हैं. आप मनुष्यों को सभी धन देने की
कृपा कीजिए. (१४)
दूसरा खंड
प्रति ष्या सूनरी जनी व्युच्छन्ती परि स्वसुः. दिवो अदर्शि दुहिता.. (१)
उषा सूर्य की बेटी हैं. वे श्रेष्ठ नारी हैं. वे अपना प्रकाश चारों ओर फैलाती हुई जाती हैं.
दिन के न दिखाई देने पर वे अपना प्रकाश फैलाती हैं. (१)
अश्वेव चित्रारुषी माता गवामृतावरी. सखा भूदश्विनोरुषाः.. (२)
उषा रश्मियों की मां हैं. वे रश्मियां अद्भुत और चमकीली हैं. वे अश्विनीकुमारों की मित्र
हैं. (२)
उत सखास्यश्विनोरुत माता गवामसि. उतोषो वस्व ईशिषे.. (३)
उषा उपासना के योग्य हैं. वे रश्मियों की मां हैं और अश्विनीकुमारों की मित्र हैं. (३)
एषो उषा अपूर्व्या व्युच्छति प्रिया दिवः. स्तुषे वामश्विना बृहत्.. (४)
हे अश्विनी! उषा अपूर्व, प्रिय व दिन लाती हैं. हम विशाल स्तोत्रों से उन की उपासना
करते हैं. (४)
या दस्रा सिन्धुमातरा मनोतरा रयीणाम्. धिया देवा वसुविदा.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! आप बुद्धिमानों के धनदाता हैं. आप नदियों को पैदा करने वाले,
मनोहर व धनवान हैं. (५)
वच्यन्ते वां ककुहासो जूर्णायामधि विष्टपि. यद्वा रथो विभिष्पतात्.. (६)
जब आप दोनों अश्विनीकुमारों का रथ पक्षी की भांति उड़ कर ऊपर जाता है तब आप
दोनों के लिए स्वर्ग में भी स्तोत्र पढ़े जाते हैं. (६)
उषस्तच्चित्रमा भरास्मभ्यं वाजिनीवति. येन तोकं च तनयं च धामहे.. (७)
हे उषा! आप धनवती और यज्ञ कार्य भी आरंभ करने वाली हैं. आप अद्भुत वैभव
दीजिए, जिस से हम संतान और अपने मित्रों का भरणपोषण करने में समर्थ हो सकें. (७)
उषो अद्येह गोमत्यश्वावति विभावरि. रेवदस्मे व्युच्छ सूनृतावति.. (८)
हे उषा! आप गोवती व अश्ववती हैं. आप रात्रि के बाद दिन लाने वाली हैं. आप हमें पुत्र
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