सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 257, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अग्नि! हमारी घी से भरी हुई हवि आप का मन हरे. वह आप तक पहुंचे. हे अग्नि!
आप हमारी उपासना को स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (८)
मन्द्र ॐ होतारमृत्विजं चित्रभानुं विभावसुम्. अग्निमीळे स उ श्रवत्.. (९)
हे अग्नि! आप देवताओं के होता, आनंददाता, अद्भुत, वैभववान व प्रकाशमान हैं.
आप हमारी स्तुतियां सुनने की कृपा कीजिए. (९)
पाहि नो अग्न एकया पाहु ३ त द्वितीयया.
पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो.. (१०)
हे अग्नि! आप एक स्तुति सुन कर हमारी रक्षा कीजिए. आप दूसरी स्तुति सुन कर
हमारी रक्षा कीजिए. आप तीसरी स्तुति सुन कर हमारी रक्षा कीजिए. आप चौथी स्तुति सुन
कर हमारी रक्षा कीजिए. (१०)
पाहि विश्वस्माद्रक्षसो अराव्णःप्र स्म वाजेषु नो ऽ व.
त्वामिद्धि नेदिष्ठं देवतातय आपिं नक्षामहे वृधे.. (११)
हे अग्नि! आप सारी राक्षसी व स्वार्थी प्रवृत्तियों से हमारी रक्षा कीजिए. आप हमारे
हितैषी हैं. आप हमारे अभीष्ट देव हैं. हम आप की शरण में हैं. (११)
दूसरा खंड
इनो राजन्नरतिः समिद्धो रौद्रो दक्षाय सुषुमाँ अदर्शि.
चिकिद्विभाति भासा बृहतासिक्र्नीमेति रुशतीमपाजन्.. (१)
हे अग्नि! आप राजा और शत्रुओं के लिए भयानक हैं. आप यजमानों की मनोकामना
पूरी करते हैं. आप चकित करने वाले आप भास्कर (प्रकाशमान) व विशाल हैं. आप रात्रि में
हवन के लिए चमकते हैं. (१)
कृष्णां यदेनीमभि वर्पसाभूज्जनयन्योषां बृहतः पितुर्जाम्.
ऊर्ध्वं भानु ॐ सूर्यस्य स्तभायन् दिवो वसुभिररतिर्वि भाति.. (२)
हे अग्नि! आप पिता (सूर्य) के जाए हैं. आप स्त्री रूप को प्रकट करते हैं. अंधेरी रात
को अपनी ज्वालाओं से हटाते हैं (परास्त करते हैं). आप अपने दिव्य तेज से सूर्य का तेज
ऊपर स्वर्गलोक में ही रोक लेते हैं. आप अपने ही तेज से तेजस्वी होते हैं. (२)
भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्.
सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितष्ठन्नुशद्भिर्वर्णैरभि राममस्थात्.. (३)
कल्याणकारी अग्नि की कल्याणकारिणी उषा सेवा करती हैं. अग्नि शत्रुनाशक हैं. वे
अपनी प्रिय बहन उषा के पास पहुंचते हैं. वे अंधेरे का नाश करते हैं. वे सर्वत्र गमनशील हैं. वे
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