सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 248, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाकं जातः क्रतुना साकमोजसा ववक्षिथ साकं वृद्धो वीर्यैः सासहिर्मृधो विचर्षणिः.
दाता राध स्तुवते काम्यं वसु प्रचेतन सैन ॐ सश्चद्देवो देव ॐ सत्य इन्दुः सत्यमिन्द्रम्..
(८)
हे इंद्र! आप अपने तेज से संसार को उठा सकते हैं. आप यज्ञ के साथ प्रकट हुए हैं.
आप वृद्धों को वीर्यवान बना सकते हैं. आप विशेष ज्ञानी, उपासकों के लिए धनदाता और
चेतन हैं. सत्य स्वरूप प्रकाशित सोमरस आप तक पहुंचता है. (८)
अध त्विषीमाँ अभ्योजसा कृविं युधाभवदा रोदसी अपृणदस्य मज्मना प्र वावृधे.
अधत्तान्यं जठरे प्रेमरिच्यत प्र चेतय सैन ॐ सश्चद्देवो देव ॐ सत्य इन्दुः सत्यमिन्द्रम्..
(९)
हे इंद्र! अपनी शक्ति से आप ने कृवि राक्षस को हराया. आप ने स्वर्गलोक और
पृथ्वीलोक के तेज में बढ़ोतरी की. आप ने सोमरस का एक भाग पेट में पहुंचाया, दूसरा शेष
भाग देवताओं के लिए बचाया. आप अन्य देवताओं को सोमपान हेतु प्रेरणा दीजिए. सत्य
स्वरूप प्रकाशित सोमरस इंद्र तक पहुंचता है. (९)