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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 210, कुल 310 में से

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पृष्ठ 210

प्र नः पिन्व विद्युदभ्रेव रोदसी धिया नो वाजां उप माहि शश्वतः.. (६)
हे सोम! आप पवित्र व लहरदार हैं. आप और अधिक क्षमताशाली बन कर इंद्र के पेट
में प्रवेश करने की कृपा कीजिए. बिजली जैसे बादलों को बरसात के लिए प्रेरित करती है,
उसी तरह आप पृथ्वीलोक पर धन बरसाइए. आप हमें बुद्धिमान, धनवान व अन्नवान
बनाइए. (६)
यदिन्द्र प्रागपागुदङ्न्यग्वा हूयसे नृभिः.
सिमा पुरू नृषूतो अस्यानवे ऽ सि प्रशर्ध तुर्वशे.. (७)
हे इंद्र! मनुष्यों द्वारा आप को सब ओर आमंत्रित किया जाता है. हम पुरु और तुर्वश के
नाश के लिए आप की उपासना करते रहे हैं. आप (हमारे सभी) शत्रुओं को नष्ट करने की
कृपा कीजिए. (७)
यद्वा रुमे रुशमे श्यावके कृप इन्द्र मादयसे सचा.
कण्वासस्त्वा स्तोमेभिर्ब्रह्मवाहस इन्द्रा यच्छन्त्या गहि.. (८)
हे इंद्र! आप रुम (इंद्र का विशेष कृपा पात्र), रुशम (इंद्र का सहयोगी), श्यावक (एक
ऋषि) और कृप (इंद्र का विशेष कृपा पात्र) पर कृपालु हैं. कण्व (एक याज्ञिक) आप की
विभिन्न स्तोत्रों से स्तुति करते हैं. आप (यजमान के अनुरोध पर) यज्ञ में पधारने की कृपा
कीजिए. (८)
उभय ॐ शृणवच्च न इन्द्रो अर्वागिदं वचः.
सत्राच्यः मघवान्त्सोमपीतये धिया शविष्ठ आ गमत्.. (९)
हे इंद्र! आप हमारे यज्ञ में पधार कर हमारी दोनों प्रकार की वाणियों को सुनने की कृपा
कीजिए. आप बलिष्ठ व संपन्न हैं. आप हमारी उपासना से प्रसन्न होइए. आप सोमपान करने
के लिए हमारे यज्ञ में पधारिए. (९)
त ॐ हि स्वराजं वृषभं तमोजसा धिषणे निष्टतक्षतुः.
उतोपमानां प्रथमो निषीदसि सोमकाम ॐ हि ते मनः.. (१०)
आकाश और पृथ्वी समर्थ व तेजोमय इंद्र को अपनी सामर्थ्य से प्रकट करते हैं. इंद्र
अनुपम हैं. (सभी उपमानों में सर्वोत्तम हैं). हे इंद्र! आप सोम (पान की) की कामना से
यज्ञवेदी पर अधिष्ठित होने की कृपा कीजिए. (१०)
आठवां खंड
पवस्व देव आयुषगिन्द्रं गच्छतु ते मदः. वायुमा रोह धर्मणा.. (१)
हे सोम! आप का रस मददायी हो कर इंद्र तक जाए. आप का रस शक्तिमान हो कर
वायु तक पहुंचने की कृपा करे. आप पवित्र हैं. आप यजमान को आयुष्मान बनाने की कृपा
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