सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 193, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअग्ने त्वं नो अन्तम उत त्राता शिवो भवा वरूत्थः.. (१)
हे अग्नि! आप हमारे समीप रहिए. आप हमारा त्राण (रक्षा) कीजिए. आप हमारे लिए
कल्याणकारी होने की कृपा कीजिए. (१)
वसुरग्निर्वसुश्रवा अच्छा नक्षि द्युमत्तमो रयिं दाः.. (२)
हे अग्नि! आप सब से धनी और सब के शरणदाता हैं. आप आसानी से हमारे पास
पधारिए. आप द्युमान (तेजस्वी) होइए व हमें धन दीजिए. (२)
तं त्वा शोचिष्ठ दीदिवः सुम्नाय नूनमीमहे सखिभ्यः.. (३)
हे अग्नि! आप दिव्य और प्रकाशमान हैं. हम मित्रों के कल्याण के लिए अच्छे मन से
निश्चित रूप से आप की उपासना करते हैं. (३)
इमा नु कं भुवना सीषधेमेन्द्रश्च विश्वे च देवाः.. (४)
हे इंद्र! सभी देव तथा सभी भुवन (लोक) हमारे लिए सुखदायी (कल्याणदायी) हों. (४)
यज्ञं च नस्तन्वं च प्रजां चादित्यैरिन्द्रः सह सीषधातु.. (५)
हे इंद्र! आप आदित्यों समेत हम पर कृपा कीजिए. आप हमारा यज्ञ सफल बनाइए.
आप हमारे शरीर को स्वस्थ बनाइए. आप हमारी संतति को सफल बनाइए. (५)
आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्मभ्यं भेषजा करत्.. (६)
आदित्यों, मरुद्गणों एवं अन्य सहयोगियों के साथ इंद्र हमारे वास्ते भेषज (रोग
चिकित्सा) तैयार करने की कृपा करें. (६)
प्र व इन्द्राय वृत्रहन्तमाय विप्राय गाथं गायत यं जुजोषते.. (७)
हे उपासको! इंद्र वृत्रहंता, विद्वान् और ब्राह्मण हैं. आप उन के लिए स्तुतियां गाइए. वे
उन स्तुतियों को सुन कर प्रसन्न होते हैं. (७)
अर्चन्त्यर्कं मरुतः स्वर्का आ स्तोभति श्रुतो युवा स इन्द्रः.. (८)
साधक सम्माननीय व प्रशंसा के योग्य इंद्र को भजते हैं. बलिष्ठ एवं प्रसिद्ध इंद्र उन को
अपना संरक्षण प्रदान करते हैं. (८)
उप प्रक्षे मधुमति क्षियन्तः पुष्येम रयिं धीमहे त इन्द्र.. (९)
हे इंद्र! आप के संरक्षण में रहने वाले हम याजक बलिष्ठ हों और धान्य से युक्त हों. (९)
eBook converter DEMO Watermarks*