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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 189

मृज्यमानः सुहस्त्या समुद्रे वाचमिन्वसि.
रयिं पिशङ्गं बहुलं पुरुस्पृहं पवमानाभ्यर्षसि.. (४)
हे सोम! अच्छे हाथों से परिष्कृत किया जाता हुआ सोमरस आवाज करते हुए
द्रोणकलश में जाता है. आप का रंग सुनहरा है. आप अनेक लोगों द्वारा चाहे जाते हैं. आप
हमें इच्छित धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (४)
पुनानो वारे पवमानो अव्यये वृषो अचिक्रदद्वने.
देवाना ꣳ सोम पवमान निष्कृतं गोभिरञ्जानो अर्षसि.. (५)
हे सोम! आप पवित्र व स्फूर्तिदायी हैं. यजमानों द्वारा परिष्कृत किया गया सोमरस जल
में बहुत जल्दी घुल जाता है. आप को देवताओं के लिए पवित्र किया जाता है. देवों के ही
लिए सोमरस में गाय का दूध मिलाया जाता है. आप को (उन्हीं के लिए) पवित्र कलश में
प्रतिष्ठित किया जाता है. (५)
एतमु त्यं दश क्षिपो मृजन्ति सिन्धुमातरम्. समादित्येभिरख्यत.. (६)
हे सोम! समुद्र आप की माता है. दसों अंगुलियों से परिष्कृत किया हुआ सोमरस
देवताओं को चढ़ाया जाता है. (६)
समिन्द्रेणोत वायुना सुत एति पवित्र आ. स ꣳ सूर्यस्य रश्मिभिः.. (७)
हे सोम! आप सूर्य की किरणों द्वारा चमकाए जाते हैं. आप पवित्र एवं सुपात्र में रखे
जाते हैं. आप इंद्र और वायु को भेंट किए जाते हैं. (७)
स नो भगाय वायवे पूष्णे पवस्व मधुमान्. चारुर्मित्रे वरुणे च.. (८)
हे सोम! आप पवित्र, मधुर व सुंदर हैं. आप को भग, वायु, पूषा, मित्र और वरुण के
लिए परिष्कृत किया जाता है. (८)
पांचवां खंड
रेवतीर्नः सधमाद इन्द्रे सन्तु तुविवाजाः. क्षुमन्तो याभिर्मदेम.. (१)
हे इंद्र! गौओं को अपने साथ रखने से हम सुख पाते हैं. आप की कृपा से हमारी गाएं
स्वस्थ और पुष्ट हों, पर्याप्त घी व दूध दें. (१)
आ घ त्वावान् त्मना युक्तः स्तोतृभ्यो धृष्णवीयानः. ऋष्णोरक्षं न चक्रयोः.. (२)
हे इंद्र! आप धीर हैं. आप बुद्धिपूर्वक स्तुतिकर्ताओं को मनोवांछित पदार्थ प्रदान करने
की कृपा कीजिए. आप इस के लिए वैसे ही सहायक हैं, जैसे रथ के लिए उस के पहिए
सहायक होते हैं. (२)
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