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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 310 में से

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पृष्ठ 185

अस्मभ्यमिन्दविन्द्रियं मधोः पवस्व धारया. पर्जन्यो वृष्टिमाँ इव.. (१६)
हे सोम! बादलों से होने वाली बरसात के समान आप अपनी पवित्र मधुर धाराओं से
हमारे लिए अमृत बरसाने की कृपा कीजिए. (१६)
दूसरा खंड
सना च सोम जेषि च पवमान महि श्रवः. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (१)
हे सोम! आप पवित्र हैं. आप बहुत उपासना के योग्य हैं. आप देवताओं के पास जाइए.
आप शत्रुओं को जीतने के बाद हमें यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (१)
सना ज्योतिः सना स्व ३ र्विश्वा च सोम सौभगा. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (२)
हे सोम! आप हमें ज्योतिर्मय बनाइए. आप हमें स्वर्गिक सुख दीजिए. आप हमें
सौभाग्यवान एवं शत्रुविजय के बाद यशस्वी बनाइए. (२)
सना दक्षमृत क्रतुमप सोम मृधो जहि अथा नो वस्यसस्कृधि.. (३)
हे सोम! आप हमें बलवान व कर्तव्यपरायण बनाइए. शत्रुनाश कर के आप हमें सुखी
बनाइए. (३)
पवीतारः पुनीतन सोममिन्द्राय पातवे. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (४)
हे यजमानो! आप सोम को पवित्र करने वाले हैं. आप इंद्र के पीने के लिए सोमरस
पवित्र कीजिए और हमारा कल्याण करने की कृपा कीजिए. (४)
त्व २४ सूर्ये न आ भज तव क्रत्वा तवोतिभिः. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (५)
हे सोम! आप अपने रक्षा साधनों से हमें सूर्य को भजने के लिए प्रेरित कीजिए. आप
हमारा हित साधने की कृपा कीजिए. (५)
तव क्रत्वा तवोतिभिर्ज्योक्पश्येम सूर्यम्. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (६)
हे सोम! आप के रक्षा साधनों और ज्ञान से हम दीर्घ काल तक सूर्य के दर्शन करने में
समर्थ हो सकें. आप हमें दीर्घायु प्रदान करने की कृपा कीजिए. (६)
अभ्यर्ष स्वायुध सोम द्विबर्हस २४ रयिम्. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (७)
हे सोम! आप आयुधधारी हैं. आप हमें इहलौकिक और पारलौकिक धन व सुख देने
की कृपा कीजिए. (७)
अभ्य ३ र्षानपच्युतो वाजिन्तसमत्सु सासहिः. अथा नो वस्यसस्कृधि.. (८)
हे सोम! आप युद्ध क्षेत्र में विजयी होते हैं. आप शत्रुओं को हराने वाले हैं. आप