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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 176

ता वा २४ सम्यगद्रुह्वाणेषमश्याम धाम च. वयं वां मित्रा स्याम.. (५)
हे सूर्य! हे वरुण! आप दोनों देव अद्वेषी हैं. हम आप की सम्यक् रूप से उपासना करते
हैं. हम आप दोनों के मित्र हो जाएं. (५)
पातं नो मित्रा पायुभिरुत त्रायेथा २४ सुत्रात्रा. साह्याम दस्यून् तनूभिः.. (६)
हे मित्र! हे वरुण! आप अपने रक्षासाधनों से हमारी रक्षा कीजिए. आप की कृपा से हम
अपने शरीर द्वारा शत्रुओं को नष्ट कर सकें. (६)
उत्तिष्ठन्नोजसा सह पीत्वा शिप्रे अवेपयः. सोममिन्द्र चमू सुतम्.. (७)
हे इंद्र! आप ओज के साथ उठिए. आप अपनी ठोड़ी को ऊपर उठाइए. आप युद्ध में
स्फूर्ति दिखाने के लिए इस सोमरस को पीजिए. (७)
अनु त्वा रोदसी उभे स्पर्धमान मदेताम्. इन्द्र यद्दस्युहाभवः.. (८)
हे इंद्र! आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक दोनों के लिए आनंददायी हैं. आप दस्युओं के
प्रति प्रतिस्पर्धा रखते हैं. आप दस्युओं का नाश करते हैं. (८)
वाचमष्टापदीमहं नवसक्तिमृतावृधम्. इन्द्रात्परितन्वं ममे.. (९)
हे इंद्र! अमृत की बढ़ोतरी करने वाली नई कल्पनाओं से परिपूर्ण, आठ पदों वाली स्तुति
स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (९)
इन्द्राग्नी युवामिमे ३ ऽ भि स्तोमा अनूषत. पिबत २४ शम्भुवा सुतम्.. (१०)
हे इंद्र! हे अग्नि! हम यजमान आप दोनों देवताओं की उपासना करते हैं. आप दोनों
सोमरस पीजिए. (१०)
या वा २४ सन्ति पुरुस्पृहो नियुतो दाशुषेः नरा. इन्द्राग्नी ताभिरा गतम्.. (११)
हे इंद्र! हे अग्नि! यजमान की आप के प्रति स्पृहा (चाहना) है. आप शीघ्र ही हवि पाने
के लिए अपने गतिशील साधनों से हमारे पास पधारने की कृपा कीजिए और दान देने वालों
की सहायता कीजिए. (११)
ताभिरा गच्छतं नरोपेद २४ सवन २४ सुतम्. इन्द्राग्नी सोमपीतये.. (१२)
हे इंद्र! हे अग्नि! आप अपने उन गतिशील साधनों से मनुष्यों के पास पधारने की कृपा
कीजिए. आप दोनों सोमरस पीने के लिए पधारिए. (१२)
चौथा खंड
अर्षा सोम द्युमत्तमो ऽ भि द्रोणानि रोरुवत्. सीदन्योनौ वनेष्वा.. (१)
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