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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 172, कुल 310 में से

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पृष्ठ 172

छठा अध्याय
पहला खंड
गोवित्पवस्व वसुविद्धिरण्यविद्रतोधा इन्दो भुवनेष्वर्पितः.
त्व ᳪ सुवीरो असि सोम विश्ववित्तं त्वा नर उप गिरेम आसते.. (१)
हे सोम! आप गौ दूध मिश्रित, पवित्र, सर्वज्ञाता, श्रेष्ठ पथ पर जाने वाले व सभी लोकों
में व्याप्त हैं. सभी उपासक आप की उपासना करते हैं. (१)
त्वं नृचक्षा असि सोम विश्वतः पवमान वृषभ ता वि धावसि.
स नः पवस्व वसुसद्धिरण्यवद्वय ᳪ स्याम भुवनेषु जीवसे.. (२)
हे सोम! आप पवित्र, स्फूर्तिदायी, सर्वव्यापक व सर्वज्ञाता हैं. आप दौड़ते हुए हमारे
पास पधारिए. आप हमें धनवान बनाइए. आप की कृपा से हम सभी लोकों में श्रेष्ठ जीवन
जीएं. (२)
ईशान इमा भुवनानि ईयसे युजान इन्दो हरितः सुपर्ण्यः.
तास्ते क्षरन्तु मधुमद्घृतं पयस्तव व्रते सोम तिष्ठन्तु कृष्टयः.. (३)
हे सोम! आप सभी लोकों के ईश्वर, हरे, सर्वत्र व्याप्त एवं मधुरता युक्त हैं. आप के रस
की धार निरंतर झरे. आप की कृपा से यजमान अपने व्रत (संकल्पों) को पूरा करने में लगे
रहें. (३)
पवमानस्य विश्ववित्प्र ते सर्गा असृक्षत. सूर्यस्येव न रश्मयः.. (४)
हे सोम! आप पवित्र व सर्वज्ञाता हैं. सूर्य की तरह आप की किरणें (रश्मियां) स्वर्ग से
फैल रही हैं. (४)
केतुं कृण्वन्दिवस्परि विश्वा रूपाभ्यर्षसि. समुद्रः सोम पिन्वसे.. (५)
हे सोम! आप सर्वव्यापक और स्वर्गलोक के ऊपर किरणों के रूप में व्याप्त हैं. आप
बरसात के रूप में पानी बरसा कर हमें संपन्नता देते हैं. (५)
जज्ञानो वाचमिष्यसि पवमान विधर्मणि. क्रन्दन्देवो न सूर्यः.. (६)
हे सोम! आप सूर्य जैसे दीप्तिमान हैं. आप वाणी से पवित्रता को प्राप्त होते हैं. आप
आवाज करते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. (६)
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