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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 168, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 168

इंद्र! आप हमें भी मदमस्त व प्रभावशाली बनाइए. (२)
बोधा सु मे मघवन्वाचमेमां यां ते वसिष्ठो अर्चति प्रशस्तिम्.
इमा ब्रह्म सधमादे जुषस्व.. (३)
हे इंद्र! आप धन के स्वामी हैं. आप यजमान की इस वाणी को सुनिए. वसिष्ठ ऋषि
प्रशस्ति गान कर के आप की अर्चना कर रहे हैं. आप उन की प्रार्थना, ब्रह्मवाणी और हवि को
स्वीकारिए. (३)
विश्वाः पृतना अभिभूतरं नरः सजूस्ततक्षुरिन्द्रं जजनुश्च राजसे.
क्रत्वे वरे स्थेमन्यामुरीमुतोग्रमोजिष्ठं तरसं तरस्विनम्.. (४)
हे इंद्र! सभी आप का महत्त्व स्वीकारते हैं. सब आप की उपासना करते हैं. आप ने
अपने बल से दुश्मनों का नाश किया. आप ने अपने श्रेष्ठ कर्मों से उच्चा पदवी पाई. आप की
महिमा गाने वाले की सामर्थ्य शक्ति बढ़ती है. आप बहुत जल्दी कार्य करते हैं. आप जल्दी
हमारी इच्छा पूरी करिए. (४)
नेमिं नमन्ति चक्षसा मेषं विप्रा अभिश्वरे.
सुदीतयो वो अद्रुहो ऽ पि कर्णे तरस्विनः समृक्वभिः.. (५)
हे इंद्र! आप पराक्रमी हैं. ब्राह्मण विनम्र स्वर में आप की प्रार्थना कर रहे हैं. आप के
उपासक विनम्र हैं. हम आंख बंद कर व झुक कर आप को नमन करते हैं. हे उपासको! आप
किसी से ईर्ष्याद्रोह मत कीजिए. आप कानों को सुहावनी लगने वाली प्रार्थनाएं इंद्र के लिए
गाइए. (५)
समु रेभासो अस्वरन्निन्द्र ॐ सोमस्य पीतये.
स्वः पतिर्यदी वृधे धृतव्रतो ह्योजसा समूतिभिः.. (६)
हे इंद्र! आप संकल्पशील, सोमरस पीने वाले, बलवान, ऐश्वर्यशाली हैं. आप यजमान
को भी महिमावान बनाने के इच्छुक हैं. यजमान इंद्र की विधिवत उपासना करते हैं. (६)
यो राजा चर्षणीनां याता रथेभिरध्रिगुः.
विश्वासां तरुता पृतनानां ज्येष्ठं यो वृत्रहा गृणे.. (७)
इंद्र राजा हैं. वे अपने रथ से तेज गति से प्रस्थान करते हैं. वे वृत्रहंता हैं. वे यजमानों के
विश्वास की रक्षा करते हैं, वे ज्येष्ठ हैं. हम उन का गुणगान करते हैं. (७)
इन्द्रं त ॐ सि शुम्भ पुरुहन्मन्नवसे यस्य द्विता विधर्त्तरि.
हस्तेन वज्रः प्रति धायि दर्शतो महाँ देवो न सूर्यः.. (८)
हे यजमानो! इंद्र वज्रधारी, देखने में सुंदर व सूर्य जैसे तेजस्वी हैं. उन में द्विधा (दोहरी)
शक्ति है. वे देवों की रक्षा, राक्षसों का नाश व हमें संरक्षण प्रदान करते हैं. हम सभी को उन
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