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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 166

इंद्र पर्वतपति हैं. बादलों में छिपी अश्वशक्ति को उन्होंने प्रकटाया. आर्यों का विरोध
करने वाली शक्तियों को छिन्नविच्छिन्न किया. (८)
अत्राह गोरमन्वत नाम त्वष्टुरपीच्यम्. इत्था चन्द्रमसो गृहे.. (९)
हे यजमानो! सूर्य निरंतर गतिमान हैं. वे चंद्रमंडल में भले ही दिखाई न दें परंतु मौजूद
रहते हैं. इस प्रकार वे चंद्रमा के घर में रहते हैं. तात्पर्य यह है कि न केवल दिन में बल्कि रात्रि
में भी सूर्य की किरणें प्रकाशित रहती हैं. (९)
इयं वामस्य मन्मन इन्द्राग्नी पूर्व्यस्तुतिः. अभ्राद्वृष्टिरिवाजनि.. (१०)
हे अग्नि! हे इंद्र! उत्तम कोटि के विद्वान् आप दोनों देवों की उपासना करते हैं. आप के
लिए की गई प्रार्थना वैसे ही सहस्र रूप से (बुद्धि में) उपजती है, जैसे बादलों के भीतर से
बरसात उपजती है. (१०)
शृणुतं जरितुर्हवमिन्द्राग्नी वनतं गिरः. ईशाना पिप्यतं धियः.. (११)
हे अग्नि! हे इंद्र! यजमान आप दोनों देवताओं की उपासना व हवि समर्पित करते हैं.
आप उसे स्वीकारने की कृपा कीजिए. आप उन की वाणी (पुकार) सुनिए. आप बुद्धि के
ईश्वर हैं. आप उन्हें उन की मेहनत का फल प्रदान कीजिए. (११)
मा पापत्वाय नो नरेन्द्राग्नी माभिशस्तये. मा नो रीरधतं निदे.. (१२)
हे अग्नि! हे इंद्र! आप नेता व उन्नतिकारक हैं. आप हमें पाप व मारधाड़ (हिंसा) से
बचाइए. आप हमें निंदनीय कार्यों से दूर रखें. (१२)
चौथा खंड
पवस्व दक्षसाधनो देवेभ्यः पीतये हरे. मरुद्भ्यो वायवे मदः.. (१)
हे सोम! आप दक्ष, साधन संपन्न, उल्लास बढ़ाने वाले व बलवर्द्धक हैं. आप देवताओं
के पीने के लिए बढ़ोतरी पाते हैं. आप मरुद्गणों के लिए प्रवाहित होइए. आप वायु के लिए
प्रवाहित होइए. (१)
सं देवैः शोभते वृषा कविर्योनावधि प्रियः. पवमानो अदाभ्यः.. (२)
हे सोम! आप कवि, प्रिय, बलवान व देवताओं के बीच शोभायमान होते हैं. आप
परिष्कृत हो कर प्रवाहित होइए. (२)
पवमान धिया हितो ३ ऽ भि योनिं कनिक्रदत्. धर्मणा वायुमारुहः.. (३)
हे सोम! बुद्धिपूर्वक आप की प्रतिष्ठा की जाती है. आप हितकारी हैं और आवाज करते
हुए द्रोणकलश में प्रवेश करते हैं. आप वायु के साथ कलश में स्थापित होइए. (३)
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