सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 157, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! हे अग्नि! आप उग्र व विघ्ननाशी हैं. हम यज्ञ में आप दोनों देवों का आह्वान
करते हैं. आप दोनों देव हमें सुखी बनाने की कृपा कीजिए. (११)
हथो वृत्राण्यार्या हथो दासानि सत्पती. हथो विश्वा अप द्विष:.. (१२)
हे इंद्र! हे अग्नि! आप श्रेष्ठ देव, आर्यों के पालनहार सभी द्वेषों को दूर करने वाले व
सत्पति हैं. आप दुश्मनों को दूर करने वाले हैं. (१२)
तीसरा खंड
अभि सोमास आयव: पवन्ते मद्यं मदम्.
समुद्रस्याधि विष्टपे मनीषिणो मत्सरासो मदच्युत:.. (१)
हे सोम! आप आनंददायी एवं स्फूर्तिदायी हैं. यजमान आनंद तथा स्फूर्ति पाने के लिए
द्रोणकलश के ऊपर रखी हुई छलनी से आप को छानते हैं. (१)
तरत्समुद्रं पवमान ऊर्मिणा राजा देव ऋतं बृहत्.
अर्षा मित्रस्य वरुणस्य धर्मणा प्र हिन्वान ऋतं बृहत्.. (२)
हे सोम! आप पवित्र, लहरदार, विशाल व राजा हैं. आप को मित्र और वरुण देव के
पीने के लिए यज्ञ में स्थापित किया जाता है. (२)
नृभिर्येमाणो हर्यतो विचक्षणो राजा देव: समुद्र्य:.. (३)
हे सोम! आप दिव्य, राजा, मनोहर व विलक्षण हैं. आप समुद्र जैसे हैं. (३)
तिस्रो वाच ईरयति प्र वह्निर्ऋतस्य धीतिं ब्रह्मणो मनीषाम्.
गावो यन्ति गोपर्ति पृच्छमाना: सोमं यन्ति मतयो वावशाना:.. (४)
हे सोम! यजमान ऋक्, यजु और साम रूप तीन वाणियों से आप का गुणगान करते हैं.
ब्राह्मण और मनीषी उसी प्रकार आप को खोजते (पूछते हुए) आते हैं, जिस प्रकार गाएं बैल
के पास जाती हैं. (४)
सोमं गावो धेनवो वावशाना: सोमं विप्रा मतिभि: पृच्छमाना:.
सोम: सुत ऋच्यते पूयमान: सोमे अर्कास्त्रिष्टुभ: सं नवन्ते.. (५)
हे सोम! दुधारू गाएं आप को चाहती हैं. ब्राह्मण पूछते हुए सोम को चाहते हैं. सुत
(यजमान) पवित्र सोम को चाहते हैं. यजमान त्रिष्टुप् छंद में रची गई प्रार्थनाओं से सोम की
उपासना करते हैं. (५)
एवा न: सोम परिषिच्यमान आ पवस्व पूयमान: स्वस्ति.
इन्द्रमा विश बृहता मदेन वर्धया वाचं जनया पुरंधिम्.. (६)
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