सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 155, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सोम! आप महान, महिमाशाली व व्रती हैं. आप शत्रुओं के सैकड़ों नगरों का नाश
करने वाले हैं. हम आप से धन चाहते हैं. (८)
अतस्त्वा रयिरभ्यवद्राजान २४ सुक्रतो दिव:. सुपर्णो अव्यथी भरत्.. (९)
हे सोम! आप सुकर्म करने वाले, धन व शक्तिदाता हैं. आप कभी व्यथित नहीं होते हैं.
गरुड़ आप को स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक पर लाने की कृपा करें. (९)
अधा हिन्वान इन्द्रियं ज्यायो महित्वमानशे. अभिष्टिकृद्विचर्षणि:.. (१०)
हे सोम! स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक पर आने के बाद आप और ज्ञानदायी (संपन्न),
महिमाशाली, आकर्षक व क्षमतावान हो जाते हैं. (१०)
विश्वस्मा इत् स्वर्दृशे साधारण २४ रजस्तुरम्. गोपामृतस्य विभ्रत्.. (११)
हे सोम! आप स्वयं प्रकाशमान हैं. आप यज्ञ के रक्षक व जल के प्रेरक हैं. आप अमृत
और दिव्य हैं. (११)
इषे पवस्व धारया मृज्यमानो मनीषिभि:. इन्दो रुचाभि गा इहि.. (१२)
हे सोम! आप ज्ञानवान हैं. मनीषी यजमान आप को परिष्कृत करते हैं. आप पौष्टिक
अन्न देने वाले है. आप अपनी धाराओं में प्रवाहित होइए. (१२)
पुनानो वरिवस्कृध्यूर्जं जनाय गिर्वण:. हरे सृजान आशिरम्.. (१३)
हे सोम! आप हरे व उपासना के योग्य हैं. आप जलवान होइए. आप यजमानों को अन्न
प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१३)
पुनानो देववीतय इन्द्रस्य याहि निष्कृतम्. द्युतानो वाजिभिर्हित:.. (१४)
हे सोम! आप पवित्र व दिव्य हैं. आप को इंद्र और देवताओं के लिए परिष्कृत किया
जाता है. आप हित साधक, द्युतिमान व शक्तिशाली हैं. आप इंद्र तक पहुंचने की कृपा
कीजिए. (१४)
दूसरा खंड
अग्निनाग्निः समिध्यते कविर्गृहपतिर्युवा. हव्यवाड् जुह्वास्य.. (१)
हे अग्नि! आप कवि, विद्वान्, युवा, हविवाहक व यज्ञ के रक्षक हैं. आप को समिधा से
प्रज्वलित किया जाता है. (१)
यस्त्वामग्ने हविष्पतिर्दूतं देव सपर्यति. तस्य स्म प्राविता भव.. (२)
हे अग्नि! आप हविपति तथा देवदूत हैं. आप की जो विधिवत रक्षा करते हैं, आप उन
की रक्षा करने की कृपा कीजिए. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*