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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 119, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 119

आरण्यक पर्व
छठा अध्याय
पहला खंड
इन्द्र ज्येष्ठं न आ भर ओजिष्ठं पुपुरि श्रवः.
यद्धिधृक्षेम वज्रहस्त रोदसी उभे सुशिप्र पप्राः.. (१)
हे इंद्र! आप वज्रपाणि (हाथ में वज्र धारण करने वाले) हैं. आप सुंदर ठुड्डी वाले हैं.
आप हमें यश और बलदायी अन्न प्रदान कीजिए. आप हमें स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक दोनों
को पुष्ट बनाने वाला धन प्रदान कीजिए. (१)
इन्द्रो राजा जगतश्चर्षणीनामधि क्षमा विश्वरूपं यदस्य.
ततो ददाति दाशुषे वसूनि चोदद्राध उपस्तुतं चिदर्वाक्.. (२)
इंद्र चराचर व पृथ्वी की सभी वस्तुओं और धनों के स्वामी हैं. वे दानदाता को सब प्रकार
का धन देते हैं. अच्छी तरह स्तुति किए जाने पर वे पर्याप्त धन देते हैं. (२)
यस्येदमा रजायुजस्तुजे जने वन ३४ स्वः. इन्द्रस्य रन्त्यं बृहत्.. (३)
तेजस्वी इंद्र का दान दानियों और स्वर्ग दोनों में प्रशंसनीय है. इंद्र का दान श्रेष्ठ और
संतोष देने वाला है. (३)
उदुत्तमं वरुण पाशमस्मदवाधमं वि मध्यम ३४ श्रथाय.
अथादित्य व्रते वयं तवानागसो अदितये स्याम.. (४)
हे वरुण! आप ऊपर और नीचे की ओर के बंधनों को हम से दूर कीजिए. आप हमारे
सारे बंधनों को शिथिल कीजिए. जिस से हम आप के विधिविधान के अनुसार चल कर पाप
और कष्ट रहित जीवन जी सकें. (४)
त्वया वयं पवमानेन सोम भरे कृतं वि चिनुयाम शश्वत्.
तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (५)
हे सोम! आप जग को पवित्र करने वाले हैं. आप की मदद से हम युद्ध में अपना कर्तव्य
भलीभांति निबाह सकें. अदिति, मित्र, वरुण, पृथ्वी, सिंधु देवता तथा स्वर्गलोक हमें यशस्वी
बनाने की कृपा करें. (५)
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