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समराङ्गणसूत्रधार (महाराज भोज - वास्तु, स्थापत्य एवं यंत्र शास्त्र)
Samarangana Sutradhara of Raja Bhoja
धाराधिपति महाराज भोज / प्रो. पुष्पेन्द्र कुमार द्वारा
DevanagariHindipublished726 पृष्ठ
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६६२ समराङ्गणसूत्रधारे
उद्वेष्टितौ यदैक एव भ्रमित उरसः स्थाने तौ द्वावपि स्याताम् ? ]
नियतमुरोमण्डलिनौ विज्ञातव्यौ तदा तज्ज्ञैः ।
इत्युरोमण्डलि(नौ) ॥
-
-
- पल्लवो हस्तस्तथाराला( हा वापरा ? ) ।
व्यावर्तनाकृतश्चैकस्तयोरन्योपवेष्टनात् ॥
उरोर्धयोगात् पार्श्वार्धयोगाच्च क्रमशः( स्थितौ ) ।
( एतौ विद्वा )न् विजानीयादुरःपार्श्वार्धमण्डलौ ॥ *
( इत्युरःपार्श्वार्धमण्डलौ ॥)
- पल्लवो हस्तस्तथाराला( हा वापरा ? ) ।
-
शुभं भूयात् ॥
- एतावानेव ग्रन्थ उपलभ्यते हस्तलिखितादर्शे ।
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CATALOGUED.
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Central Archaeological Library,
NEW DELHI.
64800
Call No. Sa TV/ Bho/ Gan
Author— Ganapati Shastri
Title— Samarangaṇa-
Sutradhara -
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