साहित्यदर्पण (आचार्य विश्वनाथ - वाक्यं रसात्मकं काव्यम् सटीक)
Sahityadarpana of Vishwanatha with Hindi Commentary
कविरत्न आचार्य विश्वनाथ / पं. शालिग्राम शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३
पृष्ठस्य पङ्क्तौ | पृष्ठस्य पङ्क्तौ
दैन्यम् ... १४७ १२ | भावपदनिरुक्तिः .. १६७ ६
श्रमः ... १४८ ७ | रसभेदाः ... ... १६८ ५
मदः ... १४८ १४ | तत्र, शृङ्गारः... ... १६९ २
जडता ... १४९ ७ | विप्रलम्भ } .. १६९ १५
उग्रता ... १५० ३ | सम्भोग }
मोह ... १५० ११ | विप्रलम्भस्वरूपम् १७० २
विबोधः ... १५१ ३ | विप्रलम्भभेदाः ... १७० ४
स्वप्नः ... १५१ ११ | तत्र, पूर्वराग १७० ६
अपस्मार ... १५२ ८ | कामदशाः ... १७१ ४
गर्वः ... १५२ १३ | तत्र, मरणे विशेष .. १७३ २
मरणम् ... १५३ २ | कामदशासु विशेषः १७४ ६
आलस्यम्... १५३ ७ | पूर्वरागभेदः ... १७४ ९
अमर्ष ... १५४ ५ | मान } ... .. १७४ १६
निद्रा ... १५४ ११ | कोपः }
अवहित्था ... १५५ २ | ईर्ष्यामान ... १७६ ८
औत्सुक्यम् ... १५५ ८ | मानभङ्गोपायाः ... १७७ ७
उन्माद ... १५६ २ | प्रवासः ... १७७ १६
शङ्का ... १५७ २ | दश कामदशाः ... १७८ ४
स्मृति ... १५७ १० | प्रवासभेदा ... १७८ १७
मतिः ... १५८ २ | करुणविप्रलम्भ ... १८० ८
व्याधि ... १५८ ८ | सम्भोग ... १८१ ६
त्रास ... १५८ १२ | सम्भोगभेदा .. १८२ ४
व्रीडा ... १५९ ५ | एवम् ... ... १८३ ३
हर्ष ... १५९ ८ | हास्यभेदा ... १८४ ८
असूया ... १६० ५ | हास्य ... १८४ १०
विषाद ... १६० ११ | करुणविप्रलम्भस्वरूपम् मे-
धृति ... १६१ ६ | दारदाणम् .. १८५ १३
चपलता ... १६१ १२ | रौद्रः .. ... १८६ २
ग्लानि ... १६२ ८ | रौद्ररसस्वरूप भेदाः...
चिन्ता ... १६३ ८ | वीरः ... ... १८७ ४
औत्सुक्य ... १६३ ७ | दानवीर
अमर्ष ... १६४ ५ | धर्मवीर
हर्ष ... १६४ ८ | युद्धवीरः } ... ... १८७ १८
मद ... १६५ ७ | दयावीरः
विबोध ... १६६ ७