सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
इस ग्रन्थ के बारे में
यह ज्योतिषाचार्य बी. एल. ठाकुर की 'सचित्र ज्योतिष शिक्षा' श्रृंखला का तृतीय (फलित) खण्ड, प्रथम भाग है। श्रृंखला के इस हिस्से में लेखक फलादेश की उस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करते हैं जिससे एक कुण्डली को पढ़कर निष्कर्ष तक पहुँचा जाता है।
लेखक की प्राक्कथन इस खण्ड का दृष्टिकोण साफ़ कर देती है। उनके अनुसार ग्रहों का फल कहने से पहले ग्रहस्पष्ट, भावस्पष्ट और ग्रहबल निकालने चाहिए; फिर ग्रहों के गुण-धर्म, दृष्टि, स्थान और उनसे बनने वाले योगों पर पूरा विचार करना चाहिए; और देश, काल तथा जातक की अवस्था को ध्यान में रखकर ही फल कहना चाहिए। वे यह भी मानते हैं कि इन सब नियमों के साथ अनुभव की नितान्त आवश्यकता है, और पुस्तक इसी अनुभव तक पहुँचाने के लिए उदाहरणों का सहारा लेती है।
श्रृंखला की शैली के अनुसार यहाँ भी चित्रों, चक्रों और उदाहरण-कुण्डलियों से बात समझाई गई है। मोतीलाल बनारसीदास से प्रकाशित इस भाग के स्कैन में १९८७ और १९९४ के पुनर्मुद्रणों का उल्लेख है। ४१८ पृष्ठों का यह खण्ड उन पाठकों के लिए है जो पहले दो भाग पढ़ चुके हैं और अब फलादेश का अभ्यास करना चाहते हैं।

(चित्र / चक्र पृष्ठ 417)
सचित्र ज्योतिष शिक्षा
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ज्योतिष के अधिकतर ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं । किन्तु संस्कृत से अनभिङ्ज व्यक्तियों के लिए >
` इस माध्यम से यका अध्ययन कठिन Š । इसलिए हिन्दी में एक् ऐसी पुस्तक की
` आवश्यकता थी, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ज्योतिष का सरलता से अध्ययन कर
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सके? ::
इस प्रयोजन को ध्यान में रखकर ही प्रस्तुत पुस्तक सात खण्डों में प्रकाशित की गई है ।
यसात खण्ड प्रारम्भिक ज्ञान, गणित, फलित, वर्ष-फल, प्रश्न मुहूर्त तथा संहिता खण्ड हैं ।
“प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड: इस खण्ड के अध्ययन से ज्योतिप-सम्बन्धी वहुत-सी बातें समझ
में आ जाती हैं, जैसे किसी का जन्म, सम्वत्, मास, पक्ष, दिन, समय आदि ज्ञात न
| । : हो, तो केवल कुण्डली-चक्र देखकर सभी बातें बताई जा स्ती हैं । बिना पंचाङ्ग
i रथि नक्षत्र, करण, वार, सूर्य, चन्द्र आदि स्पष्ट बताए. ज,: :झते-हं । रल इसी
भाग के अध्ययन से संक्षि जन्म-पत्तिका बनाई जा सकते अन्त म.फलित- ,
सॅप्बन्धी मुख्य-मुख्य बातें संक्षेप में बताई गई हें २. ५४००-7४ uu
गणित खएड: इसके दो भाग हैं । इसमें पूरी जन्मपत्री बनाने की :; प्र है प्रर ? गणित. ।
| करने की सोदाहरण रीति देकर पूरी गणित-प्रक्रिया दी गई; .। 7.13 |
u: प्रथम भागः ९०; ; द्वितीय: श; ४० I
Md प्रथम भाग: इसमें फलित-सम्बन्धी बातें दी गई. -.5 Sisi से उदाहरण देकर समझाया गया है। |:
हरि भागः इसमें ग्रहों की दृष्टि, योग, वर्ग s: ज्योतिष के आवश्यक
क us पुर सूक्ष्म विवेचन किया गयाहै। . (अ) ८५; स). १४०
शि भागः इसमें विस्तृत दशा-विचार से सांथ भाग्य, धर्म, कीर्ति विद्या, बुद्धि,
0 दु:ख आदि विषयों पर विचार प्रकट किया गया| है, माता-पिता, भाई-बन्धु
“आदि सम्बन्धो पर ग्रह-प्रभाव का ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस ग्रन्थ की उपादेयता |
: 00 ०७] अनुपम है I 24 qu
४, = फल खण्डः इसमें वर्ष-फल बनाने का पूरा गणित उदाहरण देकर समझोया गया
1०9, स्ट l
3६८४00: इसमें प्रश्न-ज्योतिष सम्बन्धी बातें दी गई हैं और किसी प्रश्न का उत्तर देन
३ कै, अभ्यास उदाहरण देकर समझाया गया है। । ४०
इसमें राष्ट्रीय ज्योतिष-सम्बन्धी विषयों पर विस्तार से विचार किया गया
|
k र 'है॥ अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियो के अनुसार देश या नगर कौ राशि स्थिर
Š करने के प्रकार बताए गए Š .। किसी भी देश के भविष्य की जानकारी के लिए । 5 ज्योतिर्विद् इस खण्ड का सफल उपयोग कर सकते हैं । भविष्यवाणी में प्राच्य और
S ~. Tamara दोनों रीतियों का च कम सारगर्भित वर्णन है । स्या | ६५
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ली वाराणसी पटना बंगलोर मद्रास
मूल्य; रू० ८५ कन
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