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सर्वकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 248, कुल 418 में से

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२३२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

मूल नक्षत्र में ३० मुहूतं हैं जिनके नाम

भूल का मुहतं नाम आइलेषा का | मूल का मुहूतं नाम. आइलेषा का

मुहुतं क्रम मुहूर्त क्रम | मुहूतं क्रम मुहूर्त क्रम

१ला राक्षस ३० वां १६ दिवाकर १५

२८२ यातुघान २९ १७ qaq १४. “t ३:17 सोम qs > १८ q. १३

४ शुक्र २७ , १९; ब्रह्मा १२

५ फणीश्वर २६ २० विष्णु ६

x ६ पिता २५ २१ यम १०

७ माता २४ २२ ईश्वर ९

८ यम २३ x २३ विष्णु ८

% ९ काल २२ २४ द्र ७

१० विश्‍व देव २१. २५ पवन ७

११ महेश्वर २० २६ स्वामी कातिकेय ५

१२ रव १९ २७ भूगरीटी ४

१३ कुवेर १८ २८ गौरी ३

१४ शुक्र १७ २९ सरस्वती २

१५ मेघ १६ . ३० वाँ प्रजापति १ पहला मूल के साथ अशुभ योग

यदि मूल नक्षत्र के समय क्षयतिथि, व्यतीपात, व्याघात, वैधृति, शूलगंड, अतिगंड

ओर परिधि योग हो विष्टि करण ( भद्रा ) हो, यमघंट, ब्रह्वादंड या मृत्यु योग आदि अशुभ योग हों तो बालक सारे कुछ का नाश करे। इसकी अवश्य शांति करानी चाहिये । ;

मूल में और भी विचार

(१) मूल नक्षत्र में जन्म हो और कृष्ण तृतीया को मंगलवार हो या कृष्ण दशमी को शनिवार हो या शुक्ल चतुदंशी को बुधवार हो तो ऐसे समय में जन्मा बालक कुल का नाश करे 1

(२) दिन, संध्या, रात्रि और प्रातःकाल में जन्म हो तो क्रम से पिता-माता, पशु ओर मित्र वर्गों को मूल नष्ट करता ë ।

(३) मूल में कन्या इतवार को जन्मे एवसुर का नाश करे । मूल नक्षत्र के १५ विभाग का फल

पूर्ण नक्षत्र की घटी मॅ १५ का भाग देने से १ भाग का समय निकल आयेगा ।

१ भाग पिता को अरिष्ट, २ भाग चाचा को अरिष्ट, ३ भाग बहनोई को अरिष्ट,

EN भाग पितामह को अरिष्ट, ५ भाग माता को अरिष्ट, ६ भाग मौसी को अरिष्ट,