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सर्वकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 288 में से

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भाव विचार : १७१

८ अष्टम भाव—इसे मृत्यु या आयु स्थान भी कहते हैं। इससे मृत्यु का निदान, आयु, संकट, शस्त्र, अकल्पित लाभ, स्त्री की ओर से धन प्राप्ति, नदी तीरता, अत्यन्त विषम मार्ग, गुदा रोग, गुह्य रोग, रिपु, दुर्गस्थान, श्रृण, रण, लावारसी धन, व्याधि का उत्पन्न होना, छिद्र मार्ग, टेढ़ी बात, युद्ध समय, शत्रु का भय, वस्तु का नाश आदि का विचार होता है। इसका प्रभाव गुह्योद्दिप्य किंवा प्रजोत्पादक इन्द्रिय पर होता है।

९ नवम स्थान—इसे धर्मस्थान कहते हैं। इससे धर्म, यद्धा, तप, तीर्थयात्रा, लौकिक, भ्राण्योदय, दूर की यात्रा, जल प्रवास, स्वप्न, तत्त्वज्ञान, बुद्धिमत्ता, प्रथ, कर्त्तव्य, दीक्षा, मठ, देवप्रह, कुश-तालाव आदि का विचार, भाग्य की वृद्धि, निर्मल स्वभाव नम्रता आदि का विचार होता है। इसका प्रभाव जंघ पर पड़ता है।

१० दशम भाव—इसे कर्मस्थान या राज्यस्थान भी कहते हैं। इससे पितृ सुख, ओहदा, कीर्ति, कर्म, कार्य से होने वाला अच्छा या बुरा काम, यज्ञ, उद्योग-धन्दा, व्यापार, मुद्रा, राजा से आदर, बड़ी पदवी की प्राप्ति का विचार, नौकरी, पेशा, अधिकार, राज्य, वृष्टि आदिक आकाशीय वृत्तांत आदिका, प्रवास ( परदेशगमन ) और श्रृण आदि का विचार होता है। इसका प्रभाव घुटने पर होता है।

११ एकादश भाव—इसे आय या लाभस्थान भी कहते हैं। अनेक प्रकार का लाभ, आशा, इच्छा, द्रव्य लाभ, आभूषण, हाथी, घोड़े, पालकी आदि ऐश्वर्य, मित्र सुख, धान्य, विद्या लाभ, परिवार, दामाद, मित्र कैसे मिलेंगे आदि का विचार होता है। इसका प्रभाव पैर व पिंडली पर होता है।

१२ द्वादश भाव—इसे व्यय स्थान कहते हैं। इससे मोक्ष, गुप्त विद्या, आध्यात्मिक विद्या, कैंद, दण्ड, शत्रु, खर्च का विचार, हानि, दान, व्यय, पाखण्ड, आत्महत्या, राजकीय संकट, कर्ज, ठगबाजी और घेरना या पकड़ना आदि का विचार इससे होता है। इसका प्रभाव पाँच का पंजा, जंगली और तलुवा पर होता है।

इस भावकुंडली से अपने सम्बन्धियों का भी विचार होता है। उसे नीचे के पैरों में चक्र में दिये अंक के अनुसार मिलावें जैसे—

१—तन, आजी, नाना। २—धन-समधि। ३—सहज, भाई, बहन, नौकर-चाकर। ४—सुहृद, मित्र, माता, ससुर। ५—पुत्र, सन्तान। ६—रिपु, काकी, मौसी, मामा, फूका। ७—जया, स्त्री, आजी, भाई-बहन की सन्तान, नानी। ८—मृत्यु, समधी। ९—धर्म, भावज, बहनोई, नाती, चाले, साली। १०—कर्म, स्वाधी, पिता, सास, राजा। ११—आय, लड़के की बहू, दामाद। १२—व्यय, काका, मामी, फूकी।