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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 288 में से

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१०४ : सचित्र ज्योषि शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

बजे भग्याङ्क और संध्या ६ बजे सदैव मानते हैं। इस मान में कोई अन्तर नहीं पड़ता।

मध्यम रवि का होरात्मक काल या नाक्षत्र काल Side real Time

अंग्रेजी पंचाङ्ग में यह काल महत्व का दिया रहता है। यह काल किसी विशेष तारिख को क्या होता है, आगे दिया है। इस काल को अंशों में परिवर्तन कर देने पर उसे मध्यम रवि का होरात्मक विषुवांश कहेंगे।

विषुववृत्त के पूरे वृत्त के ३६० अंशों को २४ घण्टों में बाँटो तो १ घण्टा=१५° या ४ मिनट=१ पड़ा। विषुवांश (विषुव रेखा के अंशों को) अंश कालादि में न बना कर उसे घण्टा मिनट में बना लेते हैं और पंचांग में यही प्रतिदिन का नाक्षत्र काल घण्टा मिनट में दिया रहता है। यह होरात्मक नाक्षत्र काल प्रतिदिन प्रायः ४ मिनट के हिसाब से बढ़ता है। इस प्रकार १५ दिन में १ घण्टा बढ़ जाता है। अंग्रेजी पंचांग में प्रतिदिन का नाक्षत्र काल दिया रहता है। यह भावसाधन आदि के काम आता है। यहाँ यह नाक्षत्र काल किस तारीख को लगभग कितने घण्टे का रहता है, आगे दिया है उस पर से किसी भी दिन का नाक्षत्र काल निकाल सकते हो। नाक्षत्र काल और तारों का विषुवांश जानने से और तारों को पहिचान लेने से रात को देख कर लगभग ठीक समय भी जान सकते हैं। २२ मार्च को नाक्षत्र काल शून्य होता है।

दोपहर ( १२ बजे ) का नाक्षत्र काल नीचे दिया है।

तारीखमहीनाघंटाता०महीनाघंटाता०महीनाघंटाता०महीनाघंटाता०
५ जनवरी१९६अप्रैल१७जुलाई७६अक्तूबर१३
२० "२०२१"२२२"८२१"१४
४ फरवरी२१७मई३६अगस्त९५नवम्बर१५
२० "२२२२"४२१"१०२०"१६
७ मार्च२३६जून५५सितम्बर११६दिसम्बर१७
२२ "२४=०२१"६२०"१२२१"१८

यदि अंग्रेजी पंचांग न हो और नाक्षत्र काल निकालना हो तो इस चक्र से निकाल सकते हो।

मान लो ५ अप्रैल दोपहर का ना० का० जानना है।

अपर २१ अप्रैल का नाक्षत्र काल २ घंटा दिया है=२ घं=० मि०

२१ तारीख से ५ अप्रैल तक अन्तर ( २१.५ )=१६ दिन

\left. \begin{array}{l} १ \text{ दिन में } ४ \text{ मिनट तो } १६ \text{ दिन में: } (१६ \times ४) \\ ६४ \text{ मिनट=} \end{array} \right\} \begin{array}{l} \text{मि०=१-४ घटाया} \\ \text{मि०शेष ०-५६} \end{array}

यह पिछले समय का है, इससे २१ अप्रैल के समय में अन्तर का समय घटाना पड़ेगा। इसलिए ५ अप्रैल के दोपहर को ना० का०=० घंटा ५६ मिनट हुआ। यह समय घंटा मिनट सेकेण्ड में निकलता है।