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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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पंचांग कैसे देखना और उपयोग : १९

पंचाङ्ग में यहाँ फाल्गुन कृष्ण अष्टमी रविवार के इष्ट ४४-३६ का ग्रह स्पष्ट दिया है। ग्रहों की स्थिति इस प्रकार समझना—

ग्रहराशिअंशकलावि०कलावि०
सूर्य१०१६१९५९ पर है गति६०१६ है
चन्द्र८१२७२४ ,, ,,८५१११ ,,
मंगल८२९६२४ ,, ,,४३५५ ,,
बुध९२२१०४९ ,, ,,८९५६ ,,
गुरु२२०४८२० ,, ,,३१३ ,, व=वक्रौ
शुक्र१११४१०४३ ,, ,,७३४४ ,, मा=मार्गी
शनि११३८३४ ,, ,,२२२

इसी प्रकार राहु केतु का भी समझना। जहाँ व. लिखा है वहाँ ग्रह की मार्गी गति का अन्त होकर वह ग्रह वक्रौ हुआ है। मा=वक्रौ गति का अन्त होकर वह ग्रह मार्गी हुआ है ऐसा समझना।

यहाँ जो ग्रहों की गति दी है वह दिन रात्रि अर्थात् ६० घड़ी की प्रतिदिन की है। यह गति सदा बदलती रहती है। ग्रह कभी वक्रौ कभी मार्गी हो जाते हैं। ग्रह के नीचे संकेताक्षर में यह ऊपर बताये अनुसार लिखा रहता है। जिसमें वक्रौ या मार्गी कुछ भी न लिखा हो उस ग्रह को मार्गी समझो, परन्तु राहु केतु सदा वक्रौ रहते हैं। किसी पंचांग में ग्रह उदय है या अस्त है यह भी ग्रह के नीचे दिया रहता है, उ=उदय, अ=अस्त, जिनके संकेताक्षर हैं।

ग्रह स्पष्ट के एक ओर गोचर ग्रह कुंडली दी रहती है। यह कुण्डली आकाश का नक्शा है जिसके विषय में आगे समझाया जायगा। पंचांग में मिश्रकालीन या प्रातःकालीन ग्रह स्पष्ट दिये रहते हैं उन्हीं के अनुसार उसके समीप ही कुंडली में स्पूल रूप से ग्रह दिये रहते हैं।

इस कुंडली में १२ राशि के १२ कोठे हैं और उनमें १-२-३ आदि क्रमानुसार राशियों के सूचक अंक लिखे रहते हैं। जैसे १ से मेष, ८ से वृश्चिक इत्यादि। ग्रह जिस राशि पर है उसी राशि के कोठे में वह ग्रह लिख दिया जाता है। जैसे ऊपर ग्रह स्पष्ट देखो सूर्य रा० १०°—१६°—१९—५९ पर है अर्थात् १० राशि व्यतीत होकर ग्यारहवीं राशि के १६° पर सूर्य है, अर्थात् सूर्य ग्यारहवीं राशि ( कुंभ राशि ) पर है। जहाँ ११ का अंक कुंडली में होगा वहाँ सूर्य का संकेताक्षर सू० लिख देंगे। सूर्य प्रधान ग्रह है वह जिस राशि पर रहता है उसी राशि को ऊपर की ओर बीच में लगन के स्थान पर पञ्चांग में लिखने की प्रथा है। चन्द्र धन का है ९ अंक जहाँ है उस कोठे में लिखा। मंगल भी नवीं राशि धन का है ९ में लिखा। बुध मकर का है १० में लिखा। गुरु मिथुन का है ३ में, शुक्र मीन का है १२ में, शनि वृष का है २ में राहु सिंह का है ५ में, केतु कृष्ण का है ११ में सूर्य के साथ लिखा है। इसी प्रकार कुंडली में ग्रह भरने की रीति अच्छीप्रकार से समझ लें। चाहिए।