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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 7

वही उस का विनियोग रहा. वैदिक मंत्रों का अर्थ समझने में देवता (विषय) ही आवश्यक है.
इसलिए मैंने केवल देवता का ही उल्लेख किया है.
अधिकांश सूक्तों में एक सूक्त का ऋषि एवं छंद एक ही है. कुछ सूक्तों में अलग-अलग
मंत्रों के अलग ऋषि एवं छंद भी हैं. सभी वर्णों के पुरुषों के अतिरिक्त कुछ नारियां भी ऋषि
हुई हैं. मंत्रों के साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र सभी ऋषि के रूप में संबंधित हैं. ब्राह्मण
एवं क्षत्रिय ऋषियों की संख्या ही सर्वाधिक है. वैश्य एवं शूद्र ऋषि एकएक ही हैं.
वैदिक आर्यों का समाज पूर्णतया विकसित एवं उन्नत समाज था. यदि ऋग्वेद में वर्णित
बातों को मानव जीवन संबंधी स्वीकार किया जाए तो आर्यों का जीवन सभी प्रकार से पूर्ण
था. ऋग्वेद में कुछ वस्तुओं एवं पशुपक्षियों के नाम एवं वर्णन साक्षात् रूप से आए हैं और
कुछ का उल्लेख अलंकार रूप में हुआ है. वर्णन चाहे किसी भी रूप में हो, पर इतना सिद्ध
हो जाता है कि ऋग्वेदकाल के लोग इन सब बातों को जानते थे. कुछ बातें उन्होंने प्रत्यक्ष
देखी थीं और कुछ की उन्हें कल्पना हो सकती है.
कवच, लोहे का द्वार, सोने अथवा लोहे की नकदी, सुसज्जित सेना, ढाल-तलवार,
कारावास, हथकड़ी-बेड़ी, आकाश में उड़ने वाला बिना घोड़ों का रथ, सौ पतवारों वाली नाव,
लोहे का नकली पैर, अंधे को आंखें मिलना, बूढ़े का दोबारा जवान होना, जुआ खेलना,
व्यभिचारिणी स्त्री का दूर जाकर गर्भपात करना, कामुकी नारी का संकेतस्थल पर आना,
कन्या के पिता द्वारा कन्या को अलंकृत करना, लकड़ी का संदूक, घोड़ा चलाने का चाबुक,
लगाम, अंकुश, सुई, कपड़ा बुनने वाला जुलाहा, घड़ा बनाने वाला कुम्हार, रथकार, सुनार,
किसान, तालाब से सिंचाई, हल जोतना आदि ऐसी बातें हैं, जो वैदिक आर्यों को सभी प्रकार
विकसित सिद्ध करती हैं.
कुछ लोगों का ऋग्वेद में व्यभिचारिणी स्त्री, गर्भपात, प्रेमी और प्रेयसी, कामी पुरुष,
कामुकी नारी, कन्या के पिता या भाई द्वारा उत्तम वर पाने हेतु दहेज देना, अयोग्य वर का
उत्तम वधू पाने हेतु मूल्य चुकाना, चोर, जुआरी, विश्वासघातक मित्र आदि का उल्लेख
अनुचित लग सकता है. इन शब्दों के वे दूसरे अर्थ करेंगे एवं तत्कालीन समाज में इन बातों
को कभी स्वीकार नहीं करेंगे. मैं वास्तविकता बताने के लिए उनसे क्षमा चाहूंगा, मेरा दृढ़
विश्वास है कि एक बुद्धिप्रधान एवं विचारशील विकसित समाज में ये बातें होनी स्वाभाविक
हैं.
दिनभर जंगल में चरकर घरों को लौटती गाय, रस्सी से बंधे बछड़े का रंभाना, गाय का
दूध दुहना, छाछ बिलोना, कच्चे मांस पर मक्खियों का बैठना, चिड़ियों का चहचहाना आदि
पढ़कर ऐसा लगता है कि भारत के गांवों में आज भी वैदिक जीवन की झलक मिल जाती है.
नागरिकता का विस्तार एवं विज्ञान की पहुंच उसे विकृत कर रही है. आर्य मुख्यतया कृषि
जीवी एवं ग्रामों में रहने वाले लोग ही थे. बाद में उन्होंने नगर भी बसाए, पर ऋग्वेद में
अधिकांश नगर शत्रु नगरों के रूप में बताए गए हैं.
मुझे ऋग्वेद का सायण भाष्यानुसार अनुवाद करने में लगभग ढाई वर्ष लगे. यदि मुझे
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