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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 56

३१. इंद्र की स्तुति १-१५
बढ़ना, पूजनीय, रक्षक, गोल चक्कर, स्मरण, परिक्रमा, फलदाता, धनदाता १-८
असमर्थ राक्षस, प्रयास, मित्रता, रक्षार्थ प्रार्थना, उपाय दीप्तिशाली, आकाश ९-१५
३२. इंद्र की स्तुति १-२४
शत्रुहंता, अभीष्टदाता, शत्रुनाशक, स्तुति, मनोहर, गोस्वामी के मित्र, गोधन का स्वामी,
अपरिवर्तनीय अभिलाषा, गौतम, नगरों का नाश, प्रदर्शन, वर्द्धित १-१२
आह्वान, अन्न, हरि नामक घोड़े लाने व पुरोडाश भक्षण हेतु प्रार्थना १३-१७
आकर्षित करना, सोना मांगना, १८-१९
धन याचना, घोड़ों की प्रशंसा, गोदाता, घोड़ों का सुशोभित होना २०-२४
३३. ऋभुओं का वर्णन १-११
घेरना, पुष्टि, तरुण बनाना, अमर पद, बात मानना, अभिलाषा, सुख से रहना १-७
रथ बनाना, कर्म स्वीकारना, हर्षित करना, मित्र न बनाना ८-११
३४. ऋभुओं की स्तुति १-११
विभु, देवश्रेणी, पूज्य देव, यज्ञ में आने व सोमपान हेतु प्रार्थना, प्रसन्न रहना, प्रशंसक,
धनदाता १-११
३५. ऋभुओं की स्तुति १-९
सुधन्वा की संतान, चमके भाग होना, कृपा, सोम निचोड़ने का आग्रह १-४
सोम वाले विभु, सोम निचोड़ना, स्वर्ग में बैठना, दानयुक्त बनाना ५-९
३६. ऋभुओं की स्तुति १-९
आकाश में घूमना, कुटिलताहीन रथ, युवा बनाना, गोचर्म से ढकना, प्रशंसनीय १-५
संरक्षण, दर्शनीय, अन्न उपजाने व यश संपादन का आग्रह ६-९
३७. ऋभुओं की स्तुति १-८
यज्ञ धारण, इच्छा, सोमरस धारण, ठोड़ियां, पुकारना १-५
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